Bermo: झारखंड स्थित डीवीसी के विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत नौ संविदा शिक्षकों ने भाकपा नेता मो. शाहजहां के नेतृत्व में अपनी सेवा स्थायीकरण को लेकर गिरिडीह सांसद को गुरुवार को बोकारो थर्मल में एक ज्ञापन सौंपा. पत्र के माध्यम से शिक्षकों ने माननीय झारखंड उच्च न्यायालय, रांची द्वारा 29 अप्रैल 2026 को जारी किए गए परमादेश को डीवीसी कोलकाता प्रबंधन से कड़ाई से क्रियान्वयन कराने की मांग की है. शिक्षकों का कहना है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देश के बावजूद डीवीसी प्रबंधन इस पर कोई संज्ञान नहीं ले रहा है, जिससे वे मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं. सांसद को सौंपे गए पत्र में शिक्षकों ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2003 में शिक्षकों के रिक्त पदों के विरुद्ध एक वैधानिक प्रक्रिया के तहत हुई थी. वर्ष 2007 में डीवीसी कोलकाता द्वारा उनके स्थायीकरण की प्रक्रिया शुरू तो की गई, लेकिन उसे कभी पूरा नहीं किया गया.
कोर्ट के परमादेश के बावजूद कार्रवाई नहीं होने का आरोप
इस प्रताड़ना से तंग आकर संविदा शिक्षकों ने माननीय झारखंड उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दस्तावेजों और दलीलों के आधार पर 29 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाया. कोर्ट ने संविदा सेवा के 10 वर्ष पूरे होने के दिन से ही उनकी सेवा का स्थायीकरण करने और उससे मिलने वाले सभी परिणामी लाभ देने का परमादेश जारी किया था. शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पूर्व भी डीवीसी कोलकाता ने अपनी ही अपील 216/2008 के माध्यम से 28 अप्रैल 2016 को मिली न्यायिक स्वीकृति का पालन नहीं किया था. इसके बाद जब कार्मिक मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 7 अक्टूबर 2020 को सेवा स्थायीकरण को लेकर आदेश जारी किया गया, तो प्रबंधन ने उसकी भी अवहेलना कर दी. पीड़ित शिक्षकों ने सांसद से प्रार्थना की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप कर डीवीसी कोलकाता से हाईकोर्ट के आदेश का पालन करवाएं, ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके और न्यायपालिका व विधायिका के आदेश का सम्मान सुरक्षित रहे. ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से संजय कुमार झा, अंजना प्रसाद, ईशा कुमारी, हरेंद्र कुमार सिंह, शबनम परवीन, विमलेश दत्त मिश्र, शोभा पाण्डेय और जय प्रकाश नारायण सहित अन्य संविदा शिक्षक शामिल थे.

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