Giridih: विकास योजनाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन कई बार जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल देती है. गिरिडीह जिले के जमुआ प्रखंड मुख्यालय स्थित सामुदायिक शौचालय इसका ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है. 15वें वित्त आयोग की राशि से लाखों रुपये खर्च कर शौचालय का सौंदर्यीकरण कराया गया और 27 जून 2025 को जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों की मौजूदगी में इसका उद्घाटन भी किया गया. हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद यह शौचालय आज तक आम लोगों के लिए नियमित रूप से शुरू नहीं हो सका है.
उद्घाटन समारोह में प्रमुख मिस्तू देवी, उप प्रमुख रब्बुल हसन रब्बानी, मुखिया बेबी देवी, प्रखंड विकास पदाधिकारी समेत कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद थे. उस दौरान दावा किया गया था कि इस शौचालय से जमुआ चौक आने-जाने वाले यात्रियों, दुकानदारों और आम नागरिकों को स्वच्छ और बेहतर सुविधा मिलेगी, लेकिन यह दावा अब तक धरातल पर नहीं उतर सका है.
रोजाना हजारों लोगों को हो रही परेशानी
जमुआ चौक जिले के व्यस्त बाजारों में गिना जाता है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण, व्यापारी, छात्र, महिलाएं और दूर-दराज से आने वाले यात्री पहुंचते हैं. इसके बावजूद सार्वजनिक शौचालय बंद रहने से लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि शौचालय का निर्माण और उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन इसका लाभ आज तक आम जनता को नहीं मिल पाया.
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने उद्घाटन कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली, लेकिन शौचालय के नियमित संचालन, साफ-सफाई और रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की गई. उनका कहना है कि यदि संचालन की तैयारी नहीं थी, तो उद्घाटन करने की जल्दबाजी क्यों दिखाई गई. मामले पर प्रमुख प्रतिनिधि ने बताया कि सफाईकर्मियों की कमी और उनके मानदेय के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण शौचालय का नियमित संचालन नहीं हो पा रहा है.
योजना के क्रियान्वयन पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि संचालन और रखरखाव के लिए पहले से बजट और मानव संसाधन की व्यवस्था नहीं थी, तो योजना को जनता के नाम समर्पित करने का औचित्य क्या था? विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सार्वजनिक परियोजना की सफलता केवल निर्माण और उद्घाटन से नहीं, बल्कि उसके नियमित संचालन और आम लोगों को मिलने वाले वास्तविक लाभ से तय होती है.
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि शौचालय को जल्द चालू कराया जाए, सफाईकर्मियों की नियुक्ति की जाए और रखरखाव के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी धन से बनी इस सुविधा का लाभ वास्तव में जनता को मिल सके.
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