बजट सत्र: जहां शोध होता है, उस टीआरआइ में डायरेक्टर और स्टाफ नहीं: रामेश्वर उरांव

रांची: झारखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 13वें दिन डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि जहां आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक...

रांची: झारखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के 13वें दिन डॉ. रामेश्वर उरांव ने कहा कि जहां आदिवासियों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति पर शोध होता है, उस ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (टीआरआइ) में पिछले एक साल से डायरेक्टर और स्टाफ नहीं हैं. उन्होंने कहा कि नियमावली नहीं बनने के कारण नियुक्ति नहीं हो सकी है. यदि शोध नहीं होगा तो नीतियां और योजनाएं कैसे बनेंगी. उन्होंने कहा कि आदिवासियों की जनसंख्या कम होने से उनके अधिकारों में कटौती हो रही है.

जनगणना ठीक से हो, इसके लिए सरकार को चौकस रहना होगा. उन्होंने कोचिंग संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की भी बात कही. साथ ही ट्राइबल सब प्लान की राशि का सही हिसाब-किताब रखने की आवश्यकता जताई. उन्होंने कहा कि एफआरए (वन अधिकार अधिनियम) का पूरा लाभ राज्य को नहीं मिल पा रहा है.

नरेश सिंह ने कहा कि एसटी-एससी छात्राओं को अत्याधुनिक सुविधाएं निःशुल्क मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि साइकिल वितरण योजना से ड्रॉपआउट दर कम हो रही है. चंद्रदेव महतो ने दिव्यांगों की पेंशन राशि बढ़ाने की मांग की. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड के छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. साथ ही झारखंड की संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिए कोचिंग की व्यवस्था करने की भी मांग की.

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तीन साल से नहीं मिली छात्रवृत्ति: जयराम महतो

जयराम महतो ने कहा कि पिछड़े वर्ग की आबादी 54 फीसदी है, लेकिन योजनाएं साइकिल और छात्रवृत्ति तक ही सीमित हैं. उन्होंने कहा कि पिछले तीन साल से छात्रवृत्ति नहीं मिली है. अल्पसंख्यकों के लिए आधुनिक छात्रावास बनाए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने संस्थानों में खाली पड़े निदेशक के पदों को जल्द भरने की मांग की.

साथ ही रांची से हज यात्रा के लिए हवाई सुविधा बहाल करने की बात कही. उन्होंने कहा कि मईंया सम्मान योजना के साथ कौशल विकास भी जरूरी है. दिव्यांग और ट्रांसजेंडर समुदाय को भी हर महीने 2500 रुपये पेंशन दिए जाने की मांग की.

जनार्दन पासवान ने कहा कि बालिका आवासीय विद्यालयों को प्लस टू तक अपग्रेड किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी भवनों और छात्रावासों की स्थिति ठीक नहीं है. चतरा जिले में 12 सीडीपीओ के पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल दो सीडीपीओ ही कार्यरत हैं.

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