हजारीबाग सदर थाना प्रभारी और ‘कटर गैंग’ का गठजोड़, दुकान कब्जा कराने के लिए पीड़ित को ही थाने में बनाया बंधक

Hazaribagh : हजारीबाग जिले से कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. हजारीबाग सदर थाना क्षेत्र के...

Hazaribagh : हजारीबाग जिले से कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है. हजारीबाग सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत कालीबाड़ी स्थित एक मकान को कब्जा दिलाने के लिए स्थानीय पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. आरोप है कि सदर थाना प्रभारी ने कानून की रक्षा करने के बजाय, सरेआम कटर से ताला काटने वाले भू-माफिया और बदमाशों का अप्रत्यक्ष रूप से साथ दिया. इस झड़प में पीड़ित परिवार का एक बेटा गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण जिंदगी की जंग लड़ रहा है, जिसे हजारीबाग सदर अस्पताल ने नाजुक हालत देखते हुए रांची रेफर कर दिया है. वहीं, दूसरी तरफ हजारीबाग सदर पुलिस मकान के वैध पावर ऑफ अटॉर्नी धारक अपूर्व सांडिल्य को ही कल रात से थाने में बिठाकर दुकान का कब्जा छोड़ने का दबाव बना रही है.

कटर लेकर पहुंचा था संजय कुमार बरनवाल

मामले की शुरुआत तब हुई जब हजारीबाग के कालीबाड़ी स्थित एक मकान (जिसकी वैध पावर ऑफ अटॉर्नी अपूर्व सांडिल्य के नाम पर है) के नीचे बनी दुकान पर काबिज दुकानदार संजय कुमार बरनवाल ने किराया देना बंद कर दिया. विवाद के बाद दुकान पर ताला लगा हुआ था. लेकिन विपक्षी संजय कुमार बरनवाल के हौसले इतने बुलंद थे कि उसने अपने भाई और सहयोगियों के साथ मिलकर एक के बाद एक तीन बार छेनी-हथौड़ी और कटर लेकर सरेआम ताला तोड़ने की कोशिश की. इस पूरी वारदात का रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कटर की चिंगारियों के बीच कानून की धज्जियां उड़ती साफ देखी जा सकती हैं.

आत्मरक्षा में उठा हाथ, तो सदर थाना प्रभारी ने बदल दी कहानी

कल जब संजय कुमार बरनवाल और उसका भाई भारी कटर लेकर ताला काट रहे थे, तभी पीड़ित अपूर्व सांडिल्य अपने भाइयों के साथ मौके पर पहुंचे. अपनी संपत्ति को लुटता देख जब उन्होंने रोका, तो संजय कुमार बरनवाल और उसके सहयोगियों ने उन पर बेरहमी से हमला कर दिया. इस हमले में अपूर्व सांडिल्य के छोटे भाई को गंभीर अंदरूनी चोटें आईं. हजारीबाग सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने चोट की गंभीरता और अंदरूनी खतरे को देखते हुए उसे तुरंत रांची रेफर कर दिया. वहीं, अवैध रूप से ताला काट रहे आरोपी संजय कुमार बरनवाल और उसके भाई को भी इस झड़प में चोटें आई हैं. असली खेल तब शुरू हुआ जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगाने हजारीबाग सदर थाना पहुंचा. सदर थाना प्रभारी ने पीड़ितों का इलाज सुनिश्चित कराने या केस दर्ज करने के बजाय अपूर्व सांडिल्य को ही थाने में बिठा लिया. आरोप है कि सदर पुलिस पहले से ही विपक्षी संजय कुमार बरनवाल का आवेदन लेकर बैठी थी. पुलिस ने पीड़ितों का आवेदन दरकिनार कर दिया और उन्हें ही थाने में रोक लिया.

सदर थाना प्रभारी की ‘खास सेटिंग’ या एकतरफा कार्रवाई का खेल?

हजारीबाग के स्थानीय हलकों में चर्चा है कि विपक्षी संजय कुमार बरनवाल इस दुकान पर अवैध कब्जे के लिए काफी समय से प्रयासरत था और इसके लिए स्थानीय रसूखदारों और ‘खाकी’ के कुछ मददगारों के जरिए पूरा ताना-बाना बुना गया था. यही वजह है कि 24 घंटे बीत जाने के बाद भी सदर पुलिस ने पीड़ितों की FIR दर्ज नहीं की है और न ही मामले में कोई निष्पक्ष कार्रवाई की है. अब सदर थाना प्रभारी का साफ फरमान है. दुकान का कब्जा दूसरे पक्ष (संजय कुमार बरनवाल) को दे दो, तो मामला रफा-दफा करा देंगे, वरना केस मुकदमा करके जेल भेज देंगे. कानून की रखवाली करने वाली पुलिस का यह रवैया सीधे तौर पर कानून हाथ में लेने वालों को बढ़ावा देने वाला है. फिलहाल, अपूर्व सांडिल्य के बुजुर्ग पिता न्याय के लिए हजारीबाग के DIG की चौखट पर गुहार लगा रहे हैं.

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