Ranchi: रांची की ऐतिहासिक रथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं का इंतजार अब खत्म होने वाला है. बुधवार को भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा एकांतवास से बाहर आएंगे. परंपरा के अनुसार भगवान ज्येष्ठ पूर्णिमा से आषाढ़ अमावस्या तक एकांतवास में रहते हैं. इसके बाद आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा की शाम उनके दर्शन होते हैं और यहीं से रथ यात्रा उत्सव की शुरुआत मानी जाती है.
शाम चार बजे से होगा नेत्रदान महोत्सव
बुधवार शाम चार बजे से मंदिर परिसर में नेत्रदान महोत्सव आयोजित होगा. श्रद्धालु दोपहर तीन बजे से ही मंदिर पहुंचने लगेंगे. भगवान के दर्शन से पहले भक्त ध्यान, भजन-कीर्तन और संकीर्तन में शामिल होंगे. सुबह नियमित पूजा-अर्चना के बाद दोपहर 12 बजे तक दर्शन मंडप में राधा-कृष्ण समेत अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाएगी.
108 दीपों की मंगल आरती, विशेष श्रृंगार के बाद खुलेंगे पट
भगवान को सबसे पहले दर्शन मंडप में लाया जाएगा, जहां उनका विशेष श्रृंगार कर नया स्वरूप दिया जाएगा. शाम पांच बजे जयघोष के बीच मंदिर के पट खोले जाएंगे. इसके बाद 108 दीपों से भव्य मंगल आरती होगी. भगवान को विभिन्न व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा. विष्णु अष्टकम और गीता के द्वादश अध्याय का पाठ होगा. इसके बाद श्रद्धालु रात नौ बजे तक भगवान के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे.
रथ यात्रा के दिन सुबह चार बजे खुलेंगे मंदिर के पट
गुरुवार को रथ यात्रा के दिन मंदिर के पट सुबह चार बजे खोल दिए जाएंगे. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश और निकास के अलग-अलग मार्ग बनाए गए हैं. दोपहर दो बजे भगवान के दर्शन बंद कर दिए जाएंगे. इसके बाद भगवान के विग्रहों को क्रमवार रथ पर विराजमान किया जाएगा. रथ के सामने विष्णु लक्षार्चना का पाठ होगा, जिसमें पुरुष श्रद्धालु धोती और महिलाएं साड़ी पहनकर शामिल होंगी.
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शाम छह बजे मौसीबाड़ी पहुंचेंगे भगवान
शाम 4:45 बजे से पांच बजे तक रथ में रस्सा बांधा जाएगा. इसके बाद जयकारों के बीच भगवान का रथ मौसीबाड़ी के लिए रवाना होगा. शाम छह बजे तक भगवान मौसीबाड़ी पहुंचेंगे. इसके बाद महिला श्रद्धालु रथ पर चढ़कर पूजा-अर्चना करेंगी. भगवान के विग्रहों को मौसीबाड़ी में स्थापित किया जाएगा. शाम सात से आठ बजे तक आम श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे. इसके बाद मंगल आरती, विष्णु अष्टकम और गीता पाठ के साथ रात साढ़े आठ बजे भगवान का शयन होगा.
बरतन, खिलौने और झूलों से सजा मेला परिसर
रथ मेला परिसर पूरी तरह सज चुका है. यहां बरतन, खिलौने, मीना बाजार और घरेलू सामानों की दुकानें लग गई हैं. लोगों ने खरीदारी भी शुरू कर दी है. बच्चों के लिए मिक्की माउस, जंपिंग पैड, टावर झूला और मौत का कुआं जैसे आकर्षण लोगों को अपनी ओर खींच रहे हैं.
परंपरागत मिठाइयों की दुकानों पर उमड़ रही भीड़
मेले में झालदा समेत कई स्थानों से आए दुकानदारों ने लड्डू, बूंदिया, बालूशाही, गाजा और शक्करपाला जैसी पारंपरिक मिठाइयों की दुकानें सजाई हैं. दुकानदारों के अनुसार मिठाइयां करीब 120 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रही हैं और रथ यात्रा के दिन बिक्री में और तेजी आने की उम्मीद है.
नगाड़ा-मांदर से लेकर तलवार और चकला-बेलन तक उपलब्ध
मेले में झारखंड की पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देखने को मिल रही है. यहां नगाड़ा और मांदर बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 2,500 से 3,500 रुपये तक है. इसके अलावा तलवार, चकला-बेलन, स्टील और लोहे के बरतन, मछली पकड़ने के जाल समेत कई घरेलू उपयोग की वस्तुएं भी बिक्री के लिए रखी गई हैं.
खाने-पीने और पूजा सामग्री की भी भरपूर व्यवस्था
मेले में समोसा, चाउमीन, गोलगप्पा, छोले-भटूरे सहित कई तरह के खाद्य स्टॉल लग चुके हैं. वहीं मुख्य मंदिर से लेकर मौसीबाड़ी तक पूजा सामग्री की दुकानें भी सज गई हैं, जहां नारियल, अगरबत्ती, फूल-माला और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध है.
