Ranchi : झारखंड HC ने बैंक ऑफ इंडिया की पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक ऋचा कुमारी को बड़ी राहत देते हुए कहा कि केवल विभागीय कार्रवाई की संभावना के आधार पर कर्मचारी का इस्तीफा अस्वीकार नहीं किया जा सकता. अदालत ने स्पष्ट किया कि विभागीय कार्यवाही तभी शुरू मानी जाती है जब कर्मचारी को विधिवत चार्जशीट जारी की जाए.
न्यायाधीश दीपक रोशन की अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता का 10 नवंबर 2023 का इस्तीफा नोटिस अवधि समाप्त होने की तिथि से प्रभावी मानते हुए स्वीकार करे. उन्हें सेवा से मुक्त करने का पत्र जारी करे तथा पीएफ, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट सहित सभी वैधानिक देयों का भुगतान वैधानिक ब्याज के साथ आठ सप्ताह के भीतर करें.
अदालत ने क्या कुछ कहा, जानें
मामले में याचिकाकर्ता ने बताया था कि 90 दिनों की नोटिस अवधि 8 फरवरी 2024 को समाप्त हो गई थी. लेकिन बैंक ने यह कहते हुए इस्तीफा स्वीकार नहीं किया कि उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित है. अदालत ने पाया कि नोटिस अवधि के दौरान याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई चार्जशीट जारी नहीं हुई थी और न ही कोई विभागीय कार्यवाही लंबित थी.
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि बैंक निर्धारित आठ सप्ताह के भीतर आदेश का पालन नहीं करता है. तो उसे 8 फरवरी 2024 से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज (तिमाही चक्रवृद्धि सहित) देना होगा. अदालत ने यह भी कहा कि इस अतिरिक्त ब्याज की राशि जिम्मेदार अधिकारी के वेतन से वसूलने के लिए बैंक स्वतंत्र होगा.
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