Ranchi: झारखंड आज एक दोराहे पर खड़ा है. एक तरफ विकास की तेज होती रफ्तार है, तो दूसरी तरफ स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ी वे अदृश्य चुनौतियाँ, जो धीरे-धीरे हमारे जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं. इसका खुलासा राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वेक्षण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की रिर्पोट में हुआ है. रिर्पोट के अनुसार झारखंड के लोग जहां मोटापे जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के खिलाफ लड़ाई में देश में सबसे बेहतर स्थिति में हैं, वहीं बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन उनके चैन की नींद छीन रहे हैं.
मोटापे के खिलाफ फिट झारखंड की मिसाल
देश के कई हिस्सों में बदलती खानपान की आदतों और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण मोटापा एक विकराल समस्या बनकर उभरा है. दक्षिण भारत के कई राज्यों में स्थिति चिंताजनक है, जहां 40% से अधिक वयस्क मोटापे की गिरफ्त में हैं. इसके विपरीत, झारखंड के लिए राहत की बात यह है कि यह राज्य उन पांच फिट राज्यों में शामिल है, जहाँ मोटापे के शिकार वयस्कों की संख्या 20% से भी कम है. झारखंड में 16.8% पुरुष और 16.9% महिलाएं ही मोटापे से प्रभावित हैं. जबकि इसी अवधि में राष्ट्रीय स्तर पर 15-49 आयु वर्ग के 27.3% पुरुष और 30.7% महिलाएं मोटापे की समस्या से जूझ रहे थे. वर्ष 2021 से 2024 के बीच देश में मोटापे की दर पुरुषों में 4% और महिलाओं में 6% बढ़ी है.
छीन रही है चैन की नींद
मोटापे पर जहां झारखंड ने बेहतर प्रदर्शन किया है, वहीं दूसरी ओर ‘जलवायु परिवर्तन’ का साया यहाँ के लोगों की नींद हराम कर रहा है. हाल ही में विश्व के 1368 शहरों पर हुए एक वैश्विक अध्ययन में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बढ़ती गर्मी के कारण लोग अपनी नींद के घंटे खो रहे हैं. इस अध्ययन में भारत के 107 शहर शामिल थे, जिसमें झारखंड की राजधानी रांची की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक पाई गई. बढ़ते तापमान और उमस के कारण रांची के लोग सालभर में औसतन 65 घंटे की नींद कम ले पा रहे हैं. चेन्नई, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों में यह स्थिति और भी गंभीर है, जहाँ लोग सालाना 80 से 93 घंटे तक की नींद गंवा रहे हैं. जमशेदपुर में लोगों की सालाना नींद में 7 घंटे की कमी दर्ज की गई है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन और बढ़ते तापमान के कारण हो रहा है.
