Chakradharpur : राजखरसावां से डोंगवापोसी के बीच प्रस्तावित चौथी रेलवे लाइन को चक्रधरपुर रेल मंडल के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है. इस रेलखंड के निर्माण से न केवल माल ढुलाई की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि पूरे कोल्हान क्षेत्र में औद्योगिक, आर्थिक और यात्री परिवहन के क्षेत्र में विकास के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है. चक्रधरपुर रेल मंडल भारतीय रेलवे के सबसे अधिक माल ढुलाई और राजस्व अर्जित करने वाले मंडलों में शामिल है.
देश के व्यस्ततम खनिज रेल मार्ग पर चौथी लाइन का रास्ता साफ
राजखरसावां–डोंगवापोसी रेलखंड लौह अयस्क और अन्य खनिजों की ढुलाई के लिए देश के व्यस्ततम रेल मार्गों में गिना जाता है. इस मार्ग पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालगाड़ियों का परिचालन होता है, जिसके कारण कई बार रेल ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है. चौथी रेल लाइन बनने से इस दबाव को कम करने और ट्रेनों का परिचालन अधिक सुगम बनाने में मदद मिलेगी. इस रेलखंड में 80 से अधिक लोडिंग साइडिंग संचालित होने का अनुमान है. इनमें टाटा स्टील, जिंदल, सेल, रुंगटा माइंस और एसीसी सीमेंट समेत कई निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की साइडिंग शामिल हैं. इन साइडिंगों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में लौह अयस्क, कोयला, चूना पत्थर, सीमेंट और अन्य औद्योगिक सामग्री देश के विभिन्न हिस्सों में भेजी जाती है. गुवा, बड़बिल, बोलानी, बांसपानी, नोवामुंडी और बड़ा जामदा जैसे क्षेत्रों में लोडिंग गतिविधियां सबसे अधिक होती हैं.
चौथी रेल लाइन बनेगी उद्योग और यात्रियों दोनों के लिए वरदान
विशेषज्ञों के अनुसार, चौथी रेल लाइन बनने से इन खनिज क्षेत्रों से माल परिवहन की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है. खनन, इस्पात और सीमेंट उद्योगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा. तेज और निर्बाध माल परिवहन से उद्योगों की लागत कम होगी, निवेश को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र में नए औद्योगिक प्रतिष्ठानों की संभावनाएं मजबूत होंगी. इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की उम्मीद है. यात्री सुविधाओं के लिहाज से भी यह परियोजना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. वर्तमान में मालगाड़ियों की अधिक आवाजाही के कारण कई बार यात्री ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ता है. चौथी लाइन बनने के बाद माल और यात्री ट्रेनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा. इससे यात्री ट्रेनों के समय पालन में सुधार के साथ भविष्य में नई यात्री ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं. पुरी, भुवनेश्वर सहित धार्मिक और पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है.
कोल्हान के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर बनेगी चौथी रेल लाइन
यह परियोजना ईस्ट कोस्ट रेलवे और दक्षिण पूर्व रेलवे के बीच रेल संपर्क को और मजबूत करेगी. साथ ही तालचर से मुंबई तक विकसित किए जा रहे मालवाहक कॉरिडोर का लाभ भी चक्रधरपुर रेल मंडल को मिल सकता है. इससे पूर्वी भारत के खनिज क्षेत्रों से पश्चिमी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों तक माल परिवहन तेज और प्रभावी हो सकेगा. रेल विशेषज्ञों का मानना है कि राजखरसावां–डोंगवापोसी चौथी रेल लाइन केवल एक रेल परियोजना नहीं, बल्कि चक्रधरपुर रेल मंडल और पूरे कोल्हान क्षेत्र के भविष्य के विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना है. इससे रेलवे की माल ढुलाई क्षमता और आय बढ़ने के साथ औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है. यही वजह है कि इस परियोजना को चक्रधरपुर रेल मंडल के विकास में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है.
