Newswave Desk: बिहार विधान परिषद में मंगलवार (21 जुलाई) को सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और पुस्तकालयाध्यक्षों के रुके हुए प्रमोशन और सेवा निरंतरता का मुद्दा जोर-शोर से उठा. बीजेपी एमएलसी जीवन कुमार ने गैर-सरकारी संकल्प पेश करते हुए सरकार से सक्षमता परीक्षा पास कर चुके शिक्षकों को जल्द प्रमोशन देने और उनकी पूर्व सेवा को मान्यता देने की मांग की. जीवन कुमार ने कहा कि शिक्षा विभाग ने समय-समय पर कई आदेश और पत्र जारी किए, लेकिन उनका पूरी तरह पालन नहीं हुआ. उन्होंने सरकार से इन आदेशों को जल्द लागू करने की मांग की.
ये रहीं प्रमुख मांगें
- सक्षमता परीक्षा पास कर चुके स्थानीय निकाय शिक्षकों को प्रशिक्षण की तिथि से सेवा निरंतरता और प्रमोशन का लाभ दिया जाए.
- स्थानीय निकाय से BPSC के जरिए विद्यालय अध्यापक बने शिक्षकों को पुरानी सेवा का लाभ मिले.
- वर्षों से लंबित प्रमोशन को जल्द पूरा किया जाए.
- प्राइमरी स्कूलों के अतिरिक्त शिक्षकों को प्रमोशन देकर मिडिल और हाई स्कूलों में पदस्थापित किया जाए, ताकि वहां शिक्षकों की कमी दूर हो सके.
MLC वंशीधर ब्रजवासी ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि करीब 23 वर्षों से शिक्षकों को प्रमोशन नहीं मिला है और बड़ी संख्या में शिक्षक बिना पदोन्नति के कार्य कर रहे हैं.
बिहार विधान परिषद में शिक्षकों की रुकी हुई प्रोन्नति और ‘सेवा निरंतरता’ का मुद्दा मजबूती से उठाया। सरकार के दबाव के बावजूद अपना संकल्प वापस नहीं लिया, क्योंकि शिक्षकों के सम्मान और अधिकार से कोई समझौता नहीं! वीडियो में देखें पूरी बात… pic.twitter.com/WdfqGyBppU
— Jeevan Kumar MLC (@JeevanKumarBjp) July 21, 2026
सरकार का जवाब
सरकार की ओर से कहा गया कि नई विशिष्ट शिक्षक नियमावली 2023 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार प्रमोशन के लिए सक्षमता परीक्षा पास करना अनिवार्य है. इसके बिना प्रमोशन नहीं दिया जा सकता. सरकार के जवाब से असंतुष्ट जीवन कुमार ने अपना संकल्प वापस लेने से इनकार कर दिया. सत्ता पक्ष के विरोध के बीच सदन में ध्वनि मत से उनका संकल्प खारिज कर दिया गया. हालांकि उन्होंने कहा कि शिक्षकों के अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी.
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