विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: कोरोना काल में लगे लॉकडाउन के दौरान पलामू समेत पूरे झारखंड में बड़े पैमाने पर हुई जंगलों की कटाई के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच की धीमी प्रगति पर गंभीर नाराजगी जताई है. अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जांच पूरी न होने पर याचिकाकर्ता कमलेश कुमार सिंह ने इस मामले में अवमानना याचिका दाखिल की है.
कोर्ट ने जांच को लेकर सवाल उठाए
जिसपर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अब इस मामले की जांच सीआईडी (CID) को सौंपी गई है. लेकिन इस मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सितंबर 2023 के आदेश के बाद भी मामले में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही है. कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब मामला 2022 का है तो अब तक जांच केवल शुरुआती चरण में क्यों अटकी हुई है? अदालत ने सीआईडी के एडीजी को इस देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को चिह्नित करने और स्पष्टीकरण देने को कहा है. इसके साथ ही अदालत ने अपने आदेश में DGP और PCCF को 2 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का समय दिया है.
अगली सुनवाई 3 अगस्त को
कोर्ट ने अधिकारीयों से स्पष्ट समय-सीमा मांगी है कि जांच कब तक पूरी कर ली जाएगी. हाईकोर्ट अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को करेगा. यह मामला वर्ष 2022 में पलामू के पांकी थाना में दर्ज प्राथमिकी कांड संख्या 07/2022 से जुड़ा है. आरोप है कि वन विभाग की कथित मिलीभगत से लॉकडाउन के दौरान बड़े पैमाने पर अवैध रूप से पेड़ काटे गए थे. इस मामले में याचिका दायर करने वाले कमलेश सिंह की ओर से अधिवक्ता अभय मिश्रा ने बहस की.
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