Giridih : नगर निगम की सफाई व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. एक ओर निगम मानसून के दौरान आधुनिक मशीनों से नालों की सफाई कर जलजमाव रोकने का दावा कर रही है. वहीं, दूसरी ओर करोड़ों रुपये की लागत से खरीदी गई सुपर सकर मशीन समेत कई आधुनिक सफाई मशीनें निगम परिसर में खुले आसमान के नीचे जंग खाती नजर आ रही है. मशीनों के उपयोग में नहीं आने का खामियाजा अब शहरवासियों को गंदगी, जलजमाव और बीमारियों के बढ़ते खतरे के रूप में भुगतना पड़ रहा है. शहर के अधिकांश छोटे-बड़े नाले गाद, प्लास्टिक और ठोस कचरे से पटे हुए है. नियमित सफाई नहीं होने के कारण हल्की बारिश में ही कई मोहल्लों की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती है. नालों का गंदा पानी सड़कों पर बहने से लोगों का पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है.
निरीक्षण हुआ, निर्देश भी मिले लेकिन जमीन पर नतीजा शून्य
हाल ही में नगर आयुक्त विजय सिंह बिरुआ ने निगम परिसर में खड़ी मशीनों का निरीक्षण किया था. उन्होंने खराब मशीनों की जल्द मरम्मत कर उन्हें सफाई अभियान में लगाने के निर्देश दिया था. मानसून को देखते हुए सुपर सकर मशीन से विशेष अभियान चलाने की भी बात कही गई थी, लेकिन अब तक शहर में इन निर्देशों को कोई असर कहीं दिखाई नहीं दे रहा है.
मशीनें है तो सफाई क्यों नहीं
स्थानीय नागरिक अनिल कुमार, गोपाल आनंद और राजीव कुमार का कहना है कि जब नगर निगम के पास आधुनिक मशीनें उपलब्ध है, तो उनका पूरा उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा. अगर समय पर मशीनों का संचालन कर नालों की सफाई होती, तो शहर को जलजमाव और गंदगी की समस्या से काफी राहत मिल सकती थी.
गंदगी से बढ़ रहा बीमारी का खतरा
नालों में जमा गंदा पानी और कचरा अब मच्छरों का अड्डा बनता जा रहा है. इससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है. लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं किया जा रहा.
शहरवासियों की मांग
लोगों ने निगम प्रशासन से मांग की है कि करोड़ों की लागत से खरीदी गई मशीनों को तत्काल चालू कर युद्धस्तर पर नालों की सफाई कराई जाए. उनका कहना है कि अगर मशीनें सिर्फ परिसर की शोभा बढ़ाने के लिए खरीदी गई है, तो यह जनता के टैक्स के पैसे की खुली बर्बादी है. अब शहर को दावों की नहीं, जमीन पर दिखने वाली सफाई की जरूरत है.
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