SAURAV SINGH
Ranchi: झारखंड में अवैध वेतन निकासी और झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामलों में अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है. सीआईडी के एडीजी मनोज कौशिक के नेतृत्व में की जा रही इस सख्त कार्रवाई के तहत अब तक दोनों चर्चित मामलों में कुल 25 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है. अवैध वेतन निकासी मामले की जांच के लिए आईजी पंकज कंबोज के नेतृत्व में की जा रही है, जबकि कथित जेपीएससी परीक्षा विवाद इसकी कमान सीआईडी एसपी संभाल रहे हैं.
अवैध वेतन निकासी मामला: जिलों में करोड़ों के फर्जीवाड़े का खुलासा
राज्य के कई जिलों में सरकारी खजाने और पुलिस लेखा शाखाओं से करोड़ों रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आए हैं, जिनमें सीआईडी और स्थानीय पुलिस लगातार गिरफ्तारियां कर रही हैं.
– बोकारो (करीब11 करोड़): एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में महालेखाकार की रिपोर्ट और वित्त विभाग के आदेश के बाद पहली प्राथमिकी दर्ज हुई. मुख्य आरोपी कौशल पांडेय के अलावा सीआईडी ने एएसआई अशोक भंडारी, होमगार्ड सतीश कुमार और काजल मंडल को गिरफ्तार किया.
– हजारीबाग (करीब 31 करोड़): एसपी कार्यालय से हुई फर्जी निकासी मामले में सिपाही शंभू कुमार सिंह।उसकी पत्नी काजल कुमारी सिपाही रजनीश कुमार सिंह उर्फ पंकज सिंह उसकी पत्नी खुशबू कुमारी सहयोगी धीरेंद्र कुमार सिंह और रिश्तेदार सौरभ कुमार को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है.
– चाईबासा (करीब 3 करोड़): मुफ्फसिल थाने की पुलिस ने मुख्य आरोपी देवनारायण मुर्मू सहित सरकार हेम्ब्रम, अरुण मार्डी औरगोराचंद मांर्डी को गिरफ्तार किया.
– रांची (2.93 करोड़): पशुपालन विभाग (इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन) से अवैध निकासी मामले में कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई. कर्मचारी मुनिंद्र कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि दूसरा आरोपी फिलहाल फरार है.
– देवघर (करीब 99 लाख): सरवां स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फर्जी तरीके से राशि गबन करने के आरोप में पूर्व लेखा लिपिक सविता कुमारी को डीसी की जांच के बाद गिरफ्तार किया गया.
– रामगढ़ (34.25 लाख): जिला पशुपालन कार्यालय में हुए फर्जीवाड़े की जांच भी तेजी से चल रही है.
जेपीएससी परीक्षा विवाद: SIT का गठन, अब तक 8 की गिरफ्तारी
जेपीएससी कथित परीक्षा विवाद की जांच के लिए एडीजी मनोज कौशिक ने एसपी पूज्य प्रकाश के नेतृत्व में सात सदस्यीय विशेष जांच टीम का गठन किया है, जिसमें डीएसपी सरिता मुर्मू, डीएसपी नेहा बाला तथा कई इंस्पेक्टर व दारोगा शामिल हैं.सीआईडी ने रांची पुलिस के सहयोग से कई होटलों में छापेमारी कर परीक्षा संचालित करने वाली विवादित एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के तीन कर्मचारियों हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार को गिरफ्तार किया. शुक्रवार को इन्हें सीआईडी की विशेष अदालत में पेश करने के बाद होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया गया. इससे पहले 22 जुलाई को सीआईडी (कांड संख्या 16/2026) ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता समेत 5 अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया था. इस प्रकार जेपीएससी मामले में अब तक गिरफ्तार लोगों की संख्या आठ हो गई है.
जाने जांच के मुख्य बिंदु
– डिजिटल टैंपरिंग: क्या परीक्षा खत्म होने के बाद सर्वर या ओएमआर शीट में बैकडेट में कोई बदलाव किया गया?
– मनी लॉन्ड्रिंग: अभ्यर्थियों से वसूली गई अवैध राशि किन-किन बैंक खातों में ट्रांसफर की गई?
– अधिकारियों की भूमिका: उत्तर प्रदेश में पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी को जेपीएससी ने किस आधार पर परीक्षा संचालन का जिम्मा सौंपा?
जानिए कैसे गहराया JPSC विवाद?
– 20 जून 2026: सहायक लोक अभियोजक भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी हुआ. परीक्षा एजेंसी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आयोग के दो सदस्यों ने परिणाम पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.
– 2 जुलाई 2026: 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के नतीजे जारी हुए. इस बार आयोग के तीनों सदस्यों ने रिजल्ट पर हस्ताक्षर नहीं किए.
– कटऑफ और गोपनीयता पर सवाल: अभ्यर्थियों ने कटऑफ सार्वजनिक न किए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई. इसके बाद जब यह बात सामने आई कि परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी यूपी में ब्लैकलिस्टेड थी, तब सीआईडी की छापेमारी और कानूनी कार्रवाई तेज हुई.
