Ranchi: देश भर में परीक्षाओं के दौरान लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. झारखंड सरकार में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला संदेश जारी किया है. उन्होंने साफ कहा है कि जब देश का जेन-जी भविष्य तकनीक पर आधारित है, तो फिर परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है.
प्रचारात्मक संदेशों से ज्यादा छात्रों की पीड़ा सुनने की नसीहत
मंत्री इरफान अंसारी ने प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक तरफ देश के लाखों छात्र अपने भविष्य को बचाने के लिए सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर केवल प्रचारात्मक संदेश परोसने के बजाय उनकी पीड़ा, चिंता और आक्रोश को सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में खोए हुए विश्वास को दोबारा बहाल करने के लिए शिक्षा मंत्रालय को एक पारदर्शी और समयबद्ध रोडमैप देश के सामने रखना होगा.
कड़े कानूनों से ज्यादा सुरक्षित तकनीक की दरकार
सरकार द्वारा बनाए गए कड़े कानूनों (10 साल की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने) पर सवाल उठाते हुए मंत्री ने कहा कि छात्रों को केवल कड़े दंड का डर नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली का भरोसा चाहिए. उन्होंने मांग की कि नीट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं को लीक-प्रूफ बनाने के लिए एयर-गैप्ड तकनीक जैसी आधुनिक प्रणालियों को लागू किया जाए, जिससे भविष्य में पेपर लीक होना पूरी तरह असंभव हो जाए.
युवाओं से टकराव मोल न लेने की नसीहत
डॉ. अंसारी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि देश के युवाओं से टकराव मोल न लिया जाए और उनके सपनों के साथ खिलवाड़ बंद हो. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी जाति, धर्म या वर्ग का आंदोलन नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों परिवारों के भविष्य की लड़ाई है. छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध पर बल प्रयोग की बजाय संवाद और न्याय की पैरवी करते हुए उन्होंने ऐलान किया कि वे खुद देश के युवाओं की आवाज़ बुलंद करने और उनके संघर्ष में शामिल होने के लिए दिल्ली आ रहे हैं. अंत में उन्होंने दो टूक कहा कि जब तक युवाओं के भविष्य की सुरक्षा की ठोस गारंटी नहीं मिलती, तब तक देश का युवा न रुकेगा और न ही झुकेगा.
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