Hazaribagh: हजारीबाग की गलियों में एक ओर जहाँ गिरते वाटर टेबल की खामोश दहशत फैल रही थी, वहीं दूसरी ओर नगर निगम के फरमानों से छोटे कारोबारियों की नींद उड़ी हुई थी. घर-घर शुद्ध पेयजल पहुँचाने वाले आरओ प्लांट संचालकों के सिर पर अचानक 25,000 रुपये के अतिरिक्त टैक्स का शिकंजा कस दिया गया. हजारीबाग नगर निगम की दंडात्मक कार्रवाई और छापेमारी से व्यापारियों में अफरा-तफरी का माहौल था. कारोबार ठप होने की कगार पर पहुँच चुका था और जनता के सामने पानी का संकट गहराने लगा था. इसी बीच इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा मोड़ तब आया, जब परेशान जल व्यवसायी हजारीबाग सदर विधायक प्रदीप प्रसाद के जनसेवा कार्यालय पहुँचे.शिकायतों का पुलिंदा सामने रखते ही माहौल में तल्खी आ गई. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए विधायक ने कड़ा रुख अपनाया और बिना वक्त गँवाए व्यवसायियों के दल को साथ लेकर सीधे नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश गुप्ता के दफ्तर में जा धमके. विधायक और नगर आयुक्त के बीच की यह मुलाक़ात महज एक औपचारिक बैठक नहीं थी, बल्कि कमरे में हुई एक बेहद गर्मा-गर्म और गंभीर वार्ता थी.
रेन वाटर हार्वेस्टिंग की एक नई जिम्मेदारी
विधायक ने दोटूक शब्दों में साफ कर दिया कि जनता को शुद्ध पानी देने वाले कारोबारियों को नियम-कानूनों के नाम पर प्रताड़ित करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.विधायक के तीखे तेवरों और ठोस तर्कों के आगे आखिरकार नगर निगम प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. नगर आयुक्त ने तुरंत मातहत अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए अतिरिक्त टैक्स की मांग और दंडात्मक कार्रवाई पर तत्काल रोक लगा दी. दबाव के इस खेल में आखिरकार जल व्यवसायियों को राहत मिली. बैठक के बाद आरओ प्लांट संचालक संजय ने राहत की सांस लेते हुए बताया कि विधायक की इस सीधी हस्तक्षेप से उनका व्यवसाय बर्बादी से बच गया है. हालांकि, इस राहत के साथ ही निगम ने व्यवसायियों के सामने रेन वाटर हार्वेस्टिंग की एक नई जिम्मेदारी भी रख दी.
गलत ड्रेनेज और ऊंचे नालों ने बिगाड़ा हजारीबाग का कुदरती वॉटर रीचार्ज
टैक्स का मुद्दा सुलझते ही बैठक का रुख शहर में गहराते उस खामोश खतरे की तरफ मुड़ गया, जो हर बीतते दिन के साथ हजारीबाग के वजूद को निगल रहा था- गिरता वाटर टेबल. विधायक ने सरकारी विभागों द्वारा योजनाओं और सौंदर्यीकरण के नाम पर किए गए अदूरदर्शी निर्माण कार्यों पर सवालों की बौछार कर दी. उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह कड़वा सच उजागर किया कि शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों के साथ जो खिलवाड़ हुआ है, वही आज के जल संकट की सबसे बड़ी वजह है.हजारीबाग में जो घुमावदार नदियां, नाले और तालाब कभी बारिश का पानी समेटकर जमीन की प्यास बुझाते थे, उन्हें कंक्रीट के जाल में दबा दिया गया. सौंदर्यीकरण के नाम पर नालों और तालाबों का लेवल इतना ऊंचा उठा दिया गया कि बारिश का पानी जमीन के भीतर जाने के बजाय सीधे बहकर शहर से बाहर निकल जाता है. प्रकृति का जो कुदरती बहाव सदियों से शहर का वाटर टेबल मेंटेन रखता था, वह विभागीय लापरवाही की बलि चढ़ गया. इस गंभीर आरोप पर नगर आयुक्त को भी स्वीकार करना पड़ा कि कई पुराने कुओं और प्राकृतिक जल स्रोतों के रास्ते बंद हो चुके हैं.
2024 की नियमावली और छापेमारी का खौफ बनाम घर-घर ट्रेनिंग का नया दांव
वार्ता का सबसे ज्यादा तनावपूर्ण दौर तब शुरू हुआ जब 2024 की नई नियमावली के तहत नगर निगम की ओर से की जा रही बोरिंग जांच, मोटर छापों और भारी-भरकम फाइन का मुद्दा मेज पर आया. रांची से आ रही टीमों और स्थानीय स्तर पर आम लोगों व छोटे कारोबारियों के खिलाफ चलाए जा रहे दंडात्मक अभियानों पर विधायक ने सख्त ऐतराज जताया. उन्होंने साफ कहा कि डर का माहौल बनाकर या फाइन वसूलकर जल संरक्षण नहीं किया जा सकता. जब नगर आयुक्त ने नियमों की दुहाई देते हुए निगम की साख और कार्रवाई को जायज ठहराने की कोशिश की, तो विधायक ने एक हैरान करने वाला प्रस्ताव सामने रख दिया. उन्होंने कहा कि छापेमारी के बजाय हर घर को रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़ने का अभियान चलाया जाना चाहिए. विधायक ने चुनौती भरे लहजे में यहाँ तक कह दिया कि अगर निगम के पास इस काम के लिए ट्रेनर नहीं हैं, तो वे खुद निजी स्तर पर एक्सपर्ट्स बुलवाएंगे और हजारीबाग के घर-घर जाकर लोगों को वाटर हार्वेस्टिंग का प्रशिक्षण दिलवाएंगे.
मास्टर प्लान की तरफ बढ़ते कदम और एक अनसुलझा सवाल
इस तीखी बहस के बीच नगर आयुक्त ने अपनी मजबूरी जाहिर करते हुए कहा कि कभी-कभी नियमों का कड़ाई से पालन इसलिए भी कराना पड़ता है ताकि प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप न लगे. हालांकि, उन्होंने भरोसा दिया कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा. इस पर विधायक प्रदीप प्रसाद ने जोर देते हुए कहा कि फॉरेस्ट, पीडब्ल्यूडी और नगर निगम जैसे सभी प्रमुख विभागों को एक टेबल पर आकर शहर की जल निकासी और वाटर रीचार्ज का एक एकीकृत मास्टर प्लान बनाना होगा. इस हाई-प्रोफाइल बैठक में डिप्टी मेयर अविनाश यादव की मौजूदगी ने भी राजनीतिक तापमान को बढ़ाए रखा. नगर निगम से टैक्स का बोझ तो हट गया और छापेमारी पर फिलहाल ब्रेक भी लग गया, लेकिन असली चुनौती अब भी बरकरार है. हजारीबाग की प्यास बुझाने के लिए क्या कंक्रीट के इस जाल को तोड़ा जा सकेगा? क्या कागजों पर बनी वाटर हार्वेस्टिंग की योजनाएं जमीन पर उतर पाएंगी या हजारीबाग का वाटर टेबल यूँ ही पाताल में समाता रहेगा, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.
