Ranchi: तीन दशकों से अधिक समय से झारखंड, ओडिशा समेत कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के चुनौती बना एक करोड़ रुपये का इनामी शीर्ष नक्सली मिसिर बेसरा आखिरकार कानून शिकंजे में आ गया है. गुप्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों ने एक बेहद गोपनीय और रणनीतिक ऑपरेशन के तहत धनबाद से मिसिर बेसरा, मोछू और उनके अन्य नक्सली सहयोगियों को गिरफ्तार कर लिया है. गिरिडीह जिले के पीरटांड़ का रहने वाला मिसिर बेसरा 1980 और 1990 के दशक में एमसीसी से जुड़ा और बाद में संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचा। 2007 में उसकी गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन 2009 में चाईबासा कोर्ट ले जाने के दौरान नक्सलियों ने विस्फोट कर उसे पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था. तब से वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था.

धनबाद के रास्ते गिरिडीह भागने की फिराक में था बेसरा:
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोल्हान के जंगलों में सुरक्षा बलों द्वारा माओवादी नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किए जाने के बाद मिसिर बेसरा लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था. हाल ही में सुरक्षा एजेंसियों को सटीक सूचना मिली थी कि वह अपने कुछ करीबी सहयोगियों के साथ धनबाद के रास्ते गिरिडीह की ओर भागने की योजना बना रहा है. सूचना मिलते ही सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे इलाके में जाल बिछाया और उसे उसके साथियों समेत धर दबोचा. फिलहाल सभी गिरफ्तार नक्सलियों को किसी अज्ञात व गुप्त स्थान पर रखकर गहन पूछताछ की जा रही है.
कौन है एक करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा?:
मिसिर बेसरा प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी (के शीर्ष नेतृत्व में शामिल है और वर्तमान में संगठन का पोलित ब्यूरो सदस्य है. झारखंड में सक्रिय शीर्ष माओवादियों की सूची में उसका नाम सबसे ऊपर आता है. वह माओवादियों की केंद्रीय समिति और सैन्य रणनीति से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण फैसलों में मुख्य भूमिका निभाता रहा है. पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला-खरसावां, खूंटी, लातेहार, चतरा, पलामू और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में हुई दर्जनों बड़ी नक्सली वारदातों के पीछे उसी का दिमाग था. खिलाफ दर्जनों गंभीर मामले दर्ज हैं, जिनमें मुख्य रूप से. सुरक्षाबलों पर जानलेवा हमले और हत्याएं,
भीषण आईईडी विस्फोट, पुलिस से हथियार लूटने की वारदातें, बड़े पैमाने पर लेवी (रंगदारी) वसूली शामिल है.
सुरक्षा एजेंसियों के लिए बहुत बड़ी राहत:
कोल्हान क्षेत्र में माओवादियों के खिलाफ लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद मिसिर बेसरा हर बार सुरक्षाबलों को चकमा देकर फरार होने में कामयाब हो जाता था. वह लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द और चुनौती बना हुआ था।।उसकी गिरफ्तारी को झारखंड और पड़ोसी राज्यों में माओवादी संगठन की कमर तोड़ने वाली सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है.
चाईबासा की मुरूम्बुरा गांव के पास मिला था मिसिर का लोकेशन:
15 दिन पहले तक मिले लोकेशन के अनुसार मिसिर बेसरा चाईबासा के टोंटो थाना क्षेत्र स्थित मुरूम्बुरा गांव की पहाड़ी के पास मौजूद था. उसके साथ 15 लाख के इनामी नक्सली वीरेंद्र हांसदा और मेहनत उर्फ मोछू भी थे. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि मिसिर बेसरा अब भी पश्चिम सिंहभूम के जंगली इलाकों में ही डेरा डाले हुए है. हालांकि लगातार हो रहे सरेंडर से उसकी सक्रियता और नेटवर्क दोनों सिमटते जा रहे हैं.
