Hazaribagh: करोड़ों रुपये की लागत से विकसित किए गए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज सह सदर अस्पताल में मरीजों को आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है. अस्पताल की दोनों लिफ्टें लंबे समय से खराब हैं, जिस कारण गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में यही सवाल उठ रहा है, कि जब अस्पताल में आधुनिक सुविधाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो फिर यह आवश्यक सुविधा महीनों से बहाल क्यों नहीं हो पा रही है?

DC ने किया था औचक निरीक्षण, दिए थे तत्काल मरम्मत के निर्देश
करीब एक सप्ताह पहले हजारीबाग के उपायुक्त ने शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज सह सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था. निरीक्षण के दौरान दोनों लिफ्टों को बंद देखकर उन्होंने नाराजगी और चिंता व्यक्त की थी. उन्होंने सिविल सर्जन तथा अस्पताल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट को स्पष्ट निर्देश दिया था, कि लिफ्टों की मरम्मत प्राथमिकता के आधार पर कराई जाए ताकि मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों, नर्सों एवं कर्मचारियों को ऊपर-नीचे आने-जाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो. लेकिन निरीक्षण के कई दिन बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है. अस्पताल आने वाले लोगों का कहना है कि आदेश तो दिए गए, लेकिन जमीन पर उसका असर दिखाई नहीं दे रहा.
हर दिन बढ़ रही परेशानी
अस्पताल की ऊपरी मंजिलों में भर्ती मरीजों तक पहुंचने के लिए परिजनों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है. गंभीर मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से सीढ़ियों के जरिए ले जाना अस्पताल कर्मियों के लिए भी चुनौती बन गया है. कई बार बुजुर्ग और महिला परिजन सीढ़ियां चढ़ते-उतरते थककर बैठ जाते हैं.
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
यह पहला अवसर नहीं है जब अस्पताल की लिफ्ट व्यवस्था सवालों के घेरे में आई हो. इससे पहले भी लिफ्ट खराब होने और मरीजों के फंसने जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठे थे.
करोड़ों की व्यवस्था, लेकिन बुनियादी सुविधा नहीं
शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज सह सदर अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. अस्पताल में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर लिफ्ट जैसी मूलभूत सुविधा का लंबे समय तक बंद रहना व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. अस्पताल वर्तमान में उन्नत सदर अस्पताल परिसर से संचालित हो रहा है.
स्वास्थ्य विभाग के दावों पर सवाल
राज्य सरकार लगातार यह दावा करती रही है, कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं है और अस्पतालों की निगरानी लगातार की जा रही है. यदि ऐसा है तो फिर हजारीबाग जैसे प्रमुख सरकारी अस्पताल में महीनों से बंद लिफ्टों की मरम्मत क्यों नहीं हो पा रही? यह सवाल मरीजों और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है.
जवाबदेही तय होगी?
अब लोगों की नजर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर है. उपायुक्त के निर्देश के बाद भी यदि व्यवस्था में सुधार नहीं होता है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जाएगा या फिर मरीजों को इसी तरह परेशान होना पड़ेगा? अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर लिफ्ट केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवनरक्षक व्यवस्था का हिस्सा होती है. ऐसे में इसे जल्द चालू कराना प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन दोनों की प्राथमिक जिम्मेदारी है.

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