गैंगस्टर सुजीत सिन्हा एनकाउंटर : घटनास्थल पर पहुंची रांची से तीन सदस्यीय FSL की टीम, टेंडर विवाद में दो सगे भाई की हत्या कर आया था चर्चा में

Ranchi: झारखंड का कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा जामताड़ा जिले के सुपायडीह में पुलिस हिरासत से भगाने के दौरान एनकाउंटर में मारा गया....

Ranchi: झारखंड का कुख्यात अपराधी सुजीत सिन्हा जामताड़ा जिले के सुपायडीह में पुलिस हिरासत से भगाने के दौरान एनकाउंटर में मारा गया. यह घटना रविवार की देर रात हुई. इस घटना के बाद सोमवार की सुबह रांची से तीन सदस्यीय एफएसएल की टीम की घटनास्थल पर पहुंची है. वहीं दूसरी तरफ सुजीत सिन्हा के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल जामताड़ा में रखा गया है. उल्लेखनीय है कि पलामू में साल 2007 में टेंडर विवाद में दो सगे भाई की हत्या करा चर्चा में आने वाले सुजीत सिन्हा रविवार की रात उस समय एनकाउंटर में मारा गया जब साहेबगंज जेल से उसे धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था. इसी दौरान कैदी वैन पंचर हो गया और वह अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इसी दौरान सुजीत सिन्हा एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर फायरिंग करते हुए भागने लगा जबकि पुलिस वाले ने उसे सरेंडर करने को कहा. इसके बावजूद भी हुआ नहीं रुका जिसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया.

साल 2019 में हुई थी आजीवन कारावास की सजा:

सुजीत सिन्हा अपराध की दुनिया में सबसे पहले 2007 में चर्चा में आया था. जब वह पलामू के टाउन थाना क्षेत्र के दो नंबर टाउन कान्दू मोहल्ला के इलाके में अनिल सिंह और भूषण सिंह नामक दो सगे भाइयों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना का मास्टरमाइंड सुजीत सिन्हा था और पहली बार उसका नाम अपराध की दुनिया में जुड़ा था.साल 2019 में पलामू कोर्ट ने इस घटना के मामले में सुजीत सिन्हा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. इस घटना के बाद से सुजीत सिन्हा अपराध की दुनिया में एक बड़ा नाम बन गया था और पलामू के इलाके में रंगदारी की घटना की शुरुआत हुई थी. इससे पहले सूचना पलामू के सदर प्रखंड में फायरिंग के मामले में जेल गया था. जेल से निकलने के बाद ही उसने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया था.

झारखंड के सबसे एक्टिव गैंगस्टरों में था सुजीत सिन्हा:

सुजीत सिन्हा पलामू जिले का रहने वाला था और झारखंड पुलिस के रिकॉर्ड में राज्य के सबसे सक्रिय संगठित अपराधियों में शामिल था. उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, लेवी वसूली, आर्म्स एक्ट, आपराधिक षड्यंत्र और संगठित अपराध समेत करीब 75 आपराधिक मामले दर्ज थे. पुलिस के अनुसार उसका नेटवर्क पलामू, गढ़वा, लातेहार, रांची, धनबाद, चतरा और अन्य जिलों तक फैला हुआ था. उस पर कोयला कारोबार, सड़क निर्माण, ठेकेदारी, क्रशर, ट्रांसपोर्ट और अन्य व्यवसायों से लेवी वसूलने के आरोप रहे हैं. जांच एजेंसियों का दावा रहा है कि जेल में बंद रहने के दौरान भी वह अपने गिरोह का संचालन करता था.

सुजीत सिन्हा गिरोह पर एनआईए का कसा था शिकंजा:

18 दिसंबर 2020 की देर शाम लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र में सुजीत सिन्हा गिरोह के अपराधियों ने जमकर उत्पात मचाया था. हथियारबंद अपराधियों ने सीसीएल की तेतरियाखाड़ कोलियरी में चार ट्रक और एक बाइक को आग के हवाले कर दिया था. इसके अलावा अपराधियों द्वारा की गई गोलीबारी में एक व्यक्ति घायल हो गया था. इस घटना की जिम्मेवारी अपराधी सुजीत सिन्हा गिरोह के प्रदीप गंझू ने ली थी. प्रदीप गंझू ने पर्चा जारी करते हुए कहा था कि तेतरियाखाड़ कोल परियोजना के एक नंबर कांटा घर में हुई घटना की जिम्मेदारी लेता हूं. इस घटना के माध्यम से रांची, चतरा, लातेहार, पलामू, हजारीबाग और रामगढ़ के सभी कोल आउटसोर्सिंग कंपनी, ट्रांसपोर्टिंग कंपनी, रैक लोडिंग, लोकल सेल संचालक और डियो होल्डर को चेतावनी देता हूं कि हमारे गैंग को बिना मैनेज किए हुए जो काम करेगा, उसका आगे भी यही अंजाम होगा. खासकर आउटसोर्सिंग कंपनी के ड्राइवर-वर्कर, ट्रांसपोर्टिंग में लगी गाड़ियों के ड्राइवर को चेतावनी है कि जब तक गैंग के मयंक भैया का आपके मालिकों से सेटलमेंट नहीं हो जाता है, आप काम ना करें, वरना सबसे पहला शिकार आप होंगे. इस मामले में एनआईए ब्रांच रांची ने कांड संख्या आरसी 01/ 2021 दर्ज कर मामले की जांच शुरू किया था.

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