Ranchi: झारखंड में इस साल मानसून की चाल ने किसानों और आम जनजीवन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. राज्य में मानसून के सीजन के शुरुआती दो महीनों यानी 1 जून से 4 अगस्त के बीच बादलों की बेरुखी साफ देखने को मिल रही है. मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि के दौरान पूरे झारखंड में सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. धान की रोपाई का पीक सीजन होने के बावजूद अधिकांश जिलों में सूखे जैसे हालात बनते दिख रहे हैं, जिससे खरीफ फसलों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं.

जिलों का हाल: कहां कितनी हुई बारिश
झारखंड के 24 जिलों में से केवल दो ही ऐसे जिले रहे जहां बारिश का विचलन सामान्य श्रेणी में दर्ज किया गया. पश्चिमी सिंहभूम एकमात्र ऐसा जिला रहा जहां सामान्य 536 मिलीमीटर के मुकाबले 586.1 मिमी वास्तविक वर्षा हुई, जो कि 9% अधिक है.सिमडेगा में यहां सामान्य वर्षा 715.4 मिमी के मुकाबले 663.4 मिमी यानी 7% कमी के साथ सामान्य श्रेणी में दर्ज की गई. राजधानी रांची में सामान्य 567.4 मिलीमीटर के मुकाबले 469.8 मिलीमीटर बारिश हुई, 17 फीसदी कमी है. सरायकेला-खरसावां में 11 फीसदी कमी दर्ज की गई है. पूर्वी सिंहभूम में 14 फीसदी कमी दर्ज की है.

सबसे खराब स्थिति वाले जिले
झारखंड के तीन ऐसे जिले रहे जहां मानसून पूरी तरह मेहरबान नहीं हुआ और बारिश में 60 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई: चतरा में सामान्य वर्षा 496.1 मिलीमीटर होनी चाहिए थी, लेकिन मात्र 182.7 मिमी ही बारिश हुई, जिससे 63 फीसदी कमी दर्ज की गई. गढ़वा में 61% कम वर्षा दर्ज की गई. पाकुड़ में 60% की भारी कमी दर्ज की गई.

अत्यधिक कमी वाले जिले
- बोकारो: कमी 39%
- देवघर: कमी 54%
- धनबाद: कमी 24%
- दुमका: कमी 21%
- गिरिडीह: कमी 46%
- गोड्डा: कमी 39%
- गुमला: कमी 36%
- हजारीबाग: कमी 40%
- जामताड़ा: कमी 31%
- खूंटी: कमी 25%
- कोडरमा: कमी 50%
- लातेहार: कमी 35%
- लोहरदगा: कमी 35%
- पलामू: कमी 46%
- रामगढ़: कमी 34%
- साहिबगंज: कमी 22%

