Hazaribagh : संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा बरही प्रखंड के करियातपुर स्थित जिला परिषद की भूमि पर सरकारी उदासीनता और बदहाल व्यवस्था की कहानी बयां कर रही है. जिस महापुरुष ने देश को संविधान दिया, उनकी प्रतिमा आज कूड़े-कचरे, झाड़ियों और गंदगी के बीच उपेक्षित पड़ी है. यह दृश्य न केवल स्थानीय लोगों की भावनाओं को आहत कर रहा है, बल्कि संबंधित विभागों और सरकारी तंत्र की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

प्रतिमा के सामने कूड़ेदान में मुर्गी के अवशेष, चारों ओर फैली गंदगी
मौके पर प्रतिमा के ठीक सामने बने सीमेंट के कूड़ेदान में मुर्गी के अवशेष पड़े मिले. आसपास भी कचरा बिखरा हुआ था, जबकि प्रतिमा के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं. लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण पूरा परिसर बदहाल दिखाई दे रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि प्रतिमा के पीछे पंचायत सचिवालय और सामने उत्क्रमित उच्च विद्यालय स्थित है. रोजाना अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षक और छात्र-छात्राएं इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन किसी ने भी प्रतिमा परिसर की सफाई और रखरखाव की जिम्मेदारी निभाना जरूरी नहीं समझा. इससे सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता उजागर होती है.

सम्मान की बातें सिर्फ भाषणों तक सीमित?
स्थानीय लोगों का कहना है कि डॉ. अंबेडकर के विचारों और योगदान की चर्चा हर वर्ष जयंती और अन्य कार्यक्रमों में की जाती है, लेकिन उनके सम्मान की वास्तविक तस्वीर करियातपुर में देखने को मिल रही है. लोगों का आरोप है कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित हैं, जबकि प्रतिमा की नियमित देखभाल की कोई व्यवस्था नहीं है. भीम आर्मी के राहुल अंबेडकर ने कहा कि प्रतिमा स्थल पर फैली गंदगी की जानकारी संगठन को मिली है. उन्होंने बताया कि संगठन के कार्यकर्ताओं के सहयोग से जल्द ही परिसर की सफाई कराई जाएगी, ताकि बाबा साहेब की प्रतिमा का सम्मान बना रहे.

पहले भी रह चुका है विवादों में यह स्थल
गौरतलब है कि जिला परिषद की इसी भूमि पर स्थित दुर्गा मंदिर परिसर में भीम आर्मी द्वारा प्रतिमा स्थापना को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है. अब प्रतिमा के आसपास फैली गंदगी ने एक बार फिर इस स्थल को चर्चा में ला दिया है. स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि प्रतिमा परिसर की तत्काल सफाई कराई जाए, नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो. लोगों का कहना है कि संविधान निर्माता के सम्मान से जुड़ी जगह की ऐसी दुर्दशा किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हो सकती.
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