Ranchi: राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों के लिए सरकारी वकीलों (लॉ ऑफिसर्स) की नियुक्ति, उनकी योग्यता, मानदेय और कार्यों को तय करने के लिए ‘झारखंड लॉ ऑफिसर्स (इंगेजमेंट) रूल्स, 2026’ लागू कर दी है. विधि विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गई है. नई नियमावली का मुख्य उद्देश्य राज्य के मुकदमों की पैरवी के लिए वकीलों का चयन पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ तरीके से सुनिश्चित करना है.

पारदर्शिता पर जोर
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के लिए वकीलों के चयन हेतु सर्च कमेटी और सिलेक्शन कमेटी का गठन किया जाएगा. विभिन्न पदों के लिए वकीलों का न्यूनतम अनुभव (5 वर्ष से 20 वर्ष तक) और पिछले तीन वर्षों से आयकरदाता होना अनिवार्य किया गया है. वकीलों के कामकाज और प्रदर्शन पर लगातार नजर रखी जाएगी. राज्य हित के खिलाफ कार्य करने या अयोग्य पाए जाने पर उन्हें हटाया जा सकेगा. सरकारी वकील अपने पद पर रहते हुए सरकार के हितों के प्रतिकूल किसी निजी मामले या व्यक्ति का पक्ष नहीं रख सकेंगे.

चयन के लिए दो-स्तरीय समितियां
सर्च कमेटी

• महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल), झारखंड – अध्यक्ष
• प्रधान सचिव, कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग – सदस्य
• प्रधान सचिव, गृह विभाग – सदस्य
• यह कमेटी पात्रता और अनुभव के आधार पर योग्य अधिवक्ताओं का पैनल तैयार कर सिलेक्शन कमेटी को भेजेगी.
सिलेक्शन कमेटी
• विधि मंत्री / मंत्री-इन-चार्ज, विधि विभाग – अध्यक्ष
• महाधिवक्ता – सदस्य
• मुख्य सचिव – सदस्य
• प्रधान सचिव-सह-कानूनी परामर्शी (लगाल रिमेंब्रान्सर), विधि विभाग – सदस्य सचिव
• यह कमेटी नामों की संस्तुति अंतिम मुहर के लिए राज्य सरकार को भेजेगी.
• सिविल और क्रिमिनल अदालतों के लिए जिला स्तर पर संबंधित जिला मजिस्ट्रेट , पुलिस अधीक्षक और प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के परामर्श से सूची तैयार कर विधि विभाग को भेजी जाएगी.
विभिन्न पदों के लिए तय की गई योग्यता
• महाधिवक्ता कार्यालय (हाईकोर्ट): सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल और एडवोकेट जनरल के लिए कम से कम 15 वर्ष का वकालत का अनुभव या सुप्रीम कोर्ट/हाईकोर्ट के डेजिग्नेटेड सीनियर एडवोकेट होना जरूरी है.
• सुप्रीम कोर्ट: सीनियर एडिशनल एडवोकेट जनरल और एडवोकेट जनरल के लिए 20 वर्ष का अनुभव, जबकि स्टैंडिंग काउंसिल के लिए 15 वर्ष का अनुभव आवश्यक है.
• सरकारी प्लीडर और लोक अभियोजक: हाईकोर्ट या सिविल कोर्ट के लिए संबंधित क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का प्रैक्टिस अनुभव अनिवार्य है.
• अतिरिक्त लोक अभियोजक : संबंधित अदालत में कम से कम 7 वर्ष का अनुभव होना चाहिए.
सख्त नियम और आचरण संबंधी शर्तें
• निजी मामलों पर प्रतिबंध: कोई भी लॉ ऑफिसर किसी ऐसे क्रिमिनल मामले में निजी पक्षकार की ओर से पेश नहीं हो पाएगा, जिसमें राज्य सरकार या उसकी एजेंसियां पक्षकार हों। दीवानी मामलों में भी महाधिवक्ता की पूर्व लिखित अनुमति लेनी होगी.
• राजनीतिक पदों पर रोक: सांसद, विधायक, नगर निगम, पार्षद या किसी भी स्थानीय निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधि इस पद के लिए पात्र नहीं होंगे.
• लॉ रिसर्च ऑफिसर: वकीलों के अनुसंधान और ड्राफ्टिंग में मदद के लिए 2 से 5 वर्ष के अनुभव वाले वकीलों को ‘लॉ रिसर्च ऑफिसर’ के रूप में नियुक्त किया जाएगा, जो इस दौरान किसी निजी पार्टी के लिए कार्य नहीं करेंगे.
कार्यनिष्पादन की समीक्षा और विशेष प्रावधान
• परफॉर्मेंस रिव्यू: महाधिवक्ता या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा यदि किसी लॉ ऑफिसर का कार्य राज्य हित के प्रतिकूल पाया जाता है, तो इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी. सरकार महाधिवक्ता के परामर्श से ऐसे वकीलों को सेवा से हटा सकती है.
• विशेष मामलों में विशेष वकील: किसी विशेष या महत्वपूर्ण राजस्व एवं जनहित के मामलों के लिए महाधिवक्ता या विधि विभाग प्रशासनिक विभाग के परामर्श से विशेष लोक अभियोजक (Special PP) या विशेष परामर्शदाता की नियुक्ति कर सकते हैं.

