News Wave Desk : आधुनिक खानपान के बढ़ते चलन के बीच लोग एक बार फिर पारंपरिक और पौष्टिक भोजन की ओर लौट रहे हैं. झारखंड के पारंपरिक व्यंजन न केवल अपने अनोखे स्वाद के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि पोषण से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभदायक माने जाते हैं. स्थानीय अनाज, दाल, हरी पत्तेदार सब्जियों और जंगलों से मिलने वाले खाद्य पदार्थों से तैयार ये व्यंजन राज्य की समृद्ध संस्कृति और खानपान की विरासत को भी दर्शाते हैं.
झारखंड के प्रमुख पारंपरिक व्यंजन
झारखंड के प्रमुख पारंपरिक व्यंजनों में धुस्का, चिल्का रोटी, पीठा, मरुआ (रागी) की रोटी, कुल्थी दाल, रुगड़ा और विभिन्न प्रकार के स्थानीय साग शामिल हैं. धुस्का चावल और दाल से बनाया जाता है, जो ऊर्जा और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. वहीं, चिल्का रोटी और कुल्थी दाल शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करती हैं. मरुआ की रोटी कैल्शियम, आयरन और फाइबर से भरपूर होती है, जबकि रुगड़ा और हरी पत्तेदार साग विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर माने जाते हैं.

स्वास्थ्य और समृद्ध के साथ नई पहचन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक भोजन में कृत्रिम तत्वों का उपयोग कम होता है और प्राकृतिक सामग्री अधिक होती है. यही कारण है कि ये व्यंजन पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को संतुलित पोषण देने में मददगार साबित हो सकते हैं. झारखंड की बदलती जीवनशैली के बीच एक बार फिर पारंपरिक पौष्टिक व्यंजन लोगों की पसंद बन रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन पारंपरिक खाद्य पदार्थों को नियमित और संतुलित आहार का हिस्सा बनाया जाए, तो बेहतर स्वास्थ्य के साथ-साथ राज्य की समृद्ध खाद्य संस्कृति को भी नई पहचान मिल सकती है.

Also Read : सरायकेला : मुख्य राज्यमार्ग NH-33 पर मिला अज्ञात शव, पुलिस ने शुरू की जांच

