palamu : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की कथित अनियमितताओं को लेकर जारी युवा आंदोलन केवल राज्य की नहीं, बल्कि देश की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है. बार-बार प्रश्नपत्र लीक होने और भर्ती प्रक्रिया विवादित होने से विद्यार्थियों का सरकार और संस्थाओं पर विश्वास कमजोर हुआ है. ये बातें पूर्व सैन्य अधिकारी और किसान ब्रिगेड के संरक्षक कर्नल (डॉ.) संजय सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा. उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को केवल डिग्री नहीं, बल्कि रोजगार और कौशल देने वाली बनाना होगा.

शिक्षा और रोजगार के बीच तालमेल
विज्ञान पढ़ने वाला विद्यार्थी बैंक और कॉमर्स पढ़ने वाला स्वास्थ्य विभाग की नौकरी के लिए आवेदन करता है. इससे स्पष्ट है कि शिक्षा और रोजगार के बीच तालमेल का अभाव है. ग्रामीण सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर चिंताजनक रूप से गिरा है. मध्यान्ह भोजन आवश्यक है, लेकिन विद्यालय का मूल उद्देश्य गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है. बच्चों की शैक्षणिक कमजोरी के लिए न शिक्षक, न प्रधानाध्यापक और न ही शिक्षा विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय होती है. प्रत्येक विद्यालय का वार्षिक शैक्षणिक मूल्यांकन कर जिम्मेदारी निर्धारित की जानी चाहिए.

रोजगार, स्वास्थ्य और विकास के आधार पर करेंगे मतदान
कर्नल सिंह ने कहा, पहले जेन-जी और अब जेन-अल्फा व्यवस्था से सवाल पूछ रही है. जागरूक युवा जाति-धर्म के बजाय शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और विकास के आधार पर मतदान करेगा. राजनीति का एक वर्ग शायद इसीलिए मतदाताओं को शिक्षित और जागरूक होते नहीं देखना चाहता. उन्होंने मांग की कि प्रश्नपत्र लीक की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच हो, दोषियों को कठोर सजा मिले, भर्ती कैलेंडर जारी किया जाए और आंदोलनरत युवाओं से सरकार तत्काल संवाद करे. देश का युवा समस्या नहीं, भारत की सबसे बड़ी शक्ति है. उसे आश्वासन नहीं, निष्पक्ष परीक्षा, रोजगार और जवाबदेही चाहिए.


