विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2026 अब तक की सबसे विवादित परीक्षा बनती जा रही है. CID की गहन जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि इस पूरे खेल की सूत्रधार आयोग की ही उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता थीं. उन्होंने अपनी कुर्सी और पद का दुरुपयोग कर परीक्षा की गोपनीय आंसर की (Answer Key) को एक निजी कंपनी के स्टाफ को व्हाट्सएप पर भेजकर लाखों अभ्यर्थियों के साथ धोखा किया. CID की अब तक की जांच के मुताबिक, अप्रैल 2026 में हुई JPSC PT परीक्षा का परिणाम घोषित होने से पहले ही 26 मई 2026 को श्वेता गुप्ता ने अपने मोबाइल नंबर 8809436753 से TDPL कंपनी के स्टाफ मो. उस्मान को पूरी आंसर की व्हाट्सएप कर दी, जबकि नियम साफ है कि परीक्षा की गोपनीय सामग्री सिर्फ पेन ड्राइव या हार्डडिस्क से ही दी जा सकती है. लेकिन श्वेता गुप्ता ने नियमों को रौंदते हुए सोशल मीडिया का सहारा लिया. जब CID ने इस बारे में उनसे सख्ती से पूछताछ की तो उनके पास कोई जवाब नहीं था. वह सवालों पर गोलमोल जवाब देकर बचने की कोशिश करती रहीं.
कुछ माह पहले ही JPSC से हो चुका स्थानांतरण
जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि श्वेता गुप्ता का कुछ माह पहले ही JPSC से स्थानांतरण हो चुका था. इसके बावजूद आयोग के बड़े अधिकारियों ने उन्हें परीक्षा नियंत्रक के पद पर बनाए रखा और सबसे संवेदनशील काम सौंपा. CID ने इस साजिश में JPSC के कर्मी मनोज तिर्की और सोनू कुमार की भूमिका को भी संदिग्ध पाया है. इन्होंने ही श्वेता गुप्ता को दस्तावेज उपलब्ध कराने में मदद की. वहीं TDPL कंपनी के जरिए मो. उस्मान और मो. अब्बय को लगाया गया था, जिनके माध्यम से गोपनीय फाइलें कंपनी परिसर तक पहुंचीं. इसके बाद सोशल मीडिया पर एक अभ्यर्थी सौरभ सुमन की OMR कार्बन कॉपी वायरल हुई, जिसमें कम प्रश्न हल करने के बावजूद उसे सफल दिखाया गया था. इससे साफ है कि यह महज चूक नहीं, बल्कि पूरी योजना के साथ किया गया काम था. उक्त जानकारी सामने आने के बाद CID ने श्वेता गुप्ता और इस पूरे प्रकरण में शामिल 19 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.
