Lohardaga: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) चीरी, लोहरदगा में भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, झारखंड द्वारा आयोजित राष्ट्रीय जनजातीय समागम में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की. इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और विरासत के संरक्षण के साथ-साथ युवाओं में राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, सेवा-भाव तथा नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं. उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विविधता को सुरक्षित रखते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है. राज्यपाल ने कहा कि झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, प्रकृति के प्रति सम्मान, सामुदायिक जीवन और लोक परंपराओं के कारण पूरे देश में विशिष्ट पहचान रखता है. यहां का जनजातीय समाज सदियों से प्रकृति के साथ संतुलित और सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देता आया है. उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के संरक्षण की भावना जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा रही है, जिससे आज पूरी दुनिया सीख ले सकती है.

अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें
राज्यपाल ने कहा कि जनजातीय समाज की कला, लोकनृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प और जीवन-दर्शन केवल झारखंड ही नहीं बल्कि पूरे भारत की अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर हैं. इन परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन केवल सरकार का नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है. उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करें और इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं. उन्होंने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन वर्षों से युवाओं में चरित्र निर्माण, अनुशासन, सेवा, नेतृत्व और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है. संगठन का आदर्श वाक्य “तैयार रहो” युवाओं को जीवन की हर चुनौती का साहसपूर्वक सामना करने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स से जुड़े युवा समाज सेवा के साथ-साथ राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में भी उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं. राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय जनजातीय समागम जैसे आयोजनों का सबसे बड़ा महत्व यह है कि देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागी एक मंच पर एकत्र होकर एक-दूसरे की संस्कृति, परंपरा और जीवन शैली को समझते हैं. इससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलता है और भारत की “विविधता में एकता” की भावना और अधिक मजबूत होती है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाएं, वेशभूषा और परंपराएं होने के बावजूद सभी भारतीय एक सूत्र में बंधे हुए हैं और यही भारत की सबसे बड़ी ताकत है.


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भारत को विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल होने से कोई नहीं रोक सकता
राज्यपाल ने अपने संबोधन में युवाओं की भूमिका पर विशेष बल देते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश “विकसित भारत-2047” के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इस लक्ष्य की प्राप्ति में युवाओं की ऊर्जा, अनुशासन, नवाचार और सेवा-भाव की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होगी. उन्होंने कहा कि आज का युवा यदि सही दिशा में आगे बढ़े तो भारत को विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल होने से कोई नहीं रोक सकता. उन्होंने युवाओं से नशामुक्त जीवन अपनाने का भी आह्वान किया. राज्यपाल ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री द्वारा “नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान” की शुरुआत की गई है, जिसका उद्देश्य युवाओं को नशे की बुराइयों से दूर रखकर राष्ट्र निर्माण में उनकी सकारात्मक भागीदारी सुनिश्चित करना है. उन्होंने कहा कि स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और संस्कारित युवा ही विकसित भारत की सबसे बड़ी शक्ति हैं.

भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की गई
समारोह के दौरान विभिन्न राज्यों से आए स्काउट्स एवं गाइड्स के प्रतिभागियों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की. कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और राष्ट्रीय एकता का अनूठा संगम देखने को मिला. राज्यपाल ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि ऐसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ युवाओं में सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की भावना को और अधिक सुदृढ़ करेंगे.

