Ranchi: घोटालों और विवादों के साए में घिरे आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों के इस्तीफे के बाद अब झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) पूरी तरह से निष्क्रिय (डिफ्कंट) हो चुका है. विवादों की शुरुआत 21 जुलाई को तब हुई जब CID ने JPSC पर बड़ी छापेमारी की. इस कार्रवाई की आंच इतनी तेज थी कि आयोग के अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब रविवार को आयोग के शेष तीनों सदस्यों डॉ. अजिता भट्टाचार्या, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. अनिमा हांसदाने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. राज्यपाल द्वारा इन सभी के इस्तीफे स्वीकार किए जाने के बाद JPSC स्वतः डिफ्कंट हो गया है, जिससे प्रशासनिक स्तर पर नीतिगत फैसले लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ गई है.
क्या है पेंच, क्या कहता है नियम?
JPSC के नियमों के अनुसार, किसी भी परीक्षा को औपचारिक रूप से रद्द करने के लिए आयोग में अध्यक्ष और कम से कम एक सदस्य का होना अनिवार्य है, इसके बाद ही आयोग की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है. चूंकि आयोग में फिलहाल कोई पदाधिकारी ही नहीं बचा है, इसलिए सचिव या परीक्षा नियंत्रक केवल परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्देश दे सकते हैं, लेकिन उन्हें रद्द करने का अधिकार केवल पूर्ण रूप से गठित आयोग के पास ही होता है.
ये परीक्षाएं हुई हैं स्थगित
• 1 अगस्त से शुरू होने वाली सिविल सेवा बैकलॉग-2023
• 8 अगस्त से शुरू होने वाली सिविल सेवा बैकलॉग-2025
• 6 सितंबर को प्रस्तावित सिविल जज जूनियर लिखित परीक्षा
• 8 सितंबर को प्रस्तावित एपीपी बैकलॉग लिखित परीक्षा
• 11 सितंबर से होने वाली फैक्ट्री इंस्पेक्टर लिखित परीक्षा
• 19 सितंबर से शुरू होने वाली प्रोजेक्ट मैनेजर लिखित परीक्षा
• 25 सितंबर से प्रस्तावित एपीपी रेगुलर लिखित परीक्षा
• 26 सितंबर से होने वाली बॉयलर इंस्पेक्टर लिखित परीक्षा.
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