Lohardaga: झारखंड आदिवासी महोत्सव में शामिल होने पहुंचीं झारखंड कैडर की आईआरएस अधिकारी निशा उरांव ने आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपरा, भाषा और पहचान के संरक्षण को लेकर अपनी राय रखी. कशिश न्यूज से बातचीत में उन्होंने आदिवासी अस्मिता, नेतृत्व, महिला भागीदारी और समाज सेवा जैसे मुद्दों पर बात की.
संस्कृति और पहचान की रक्षा को बताया प्राथमिक उद्देश्य
निशा उरांव ने कहा कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और पहचान को बचाने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहा है. इसे पारंपरिक उलगुलान के रूप में देखा जा सकता है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी अपनी संस्कृति और परंपरा के संरक्षण के लिए काम करता है. ऐसे में कुछ विचारों में समानता होना स्वाभाविक है. इसी कारण उनका नाम IAS से जोड़ा जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य आदिवासी समाज की संस्कृति और परंपरा को सुरक्षित रखना है.
राजनीतिक नेतृत्व को लेकर उन्होंने कहा कि लोहरदगा जैसे क्षेत्र को मजबूत, दूरदर्शी और समाज के प्रति समर्पित नेतृत्व की जरूरत है. नेतृत्व का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के विकास और लोगों के हित में काम करना होना चाहिए. महिला नेतृत्व और आरक्षण पर उन्होंने कहा कि महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे आने का अवसर मिलना चाहिए. राजनीति और सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से समाज का समग्र विकास संभव है.
पद नहीं, समाज सेवा है प्राथमिकता, संस्कृति और भाषा संरक्षण पर दिया जोर
निशा उरांव ने कहा कि उन्हें किसी पद या राजनीतिक जिम्मेदारी का लालच नहीं है. बिना किसी पद के भी समाज की सेवा की जा सकती है. उन्होंने कहा कि वह वर्तमान में समाज के बीच रहकर सामाजिक मुद्दों पर काम कर रही हैं और आगे भी लोगों से जुड़कर समाजहित में काम करती रहेंगी. उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है. इसके लिए समाज के हर वर्ग को मिलकर प्रयास करना होगा. महोत्सव में विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव के पुत्र रोहित प्रियदर्शी समेत जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न संगठनों के लोग मौजूद रहे. कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया.
ALSO READ: पूरी तरह डिफ्कंट हो गया झारखंड लोक सेवा आयोग, पेच में फंसी परीक्षाएं

