Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का आज जन्मदिन है. आज वह 50 साल के हो गये हैं. हेमंत सोरेन का जन्म 10 अगस्त, 1975 को रामगढ़ जिला के नेमरा में हुआ था. हेमंत सोरेन के जन्मदिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई देते हुए कहा है, कि “झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी को उनके जन्मदिन पर बहुत-बहुत शुभकामनाएं. भगवान उन्हें लंबी उम्र और अच्छी सेहत दे.”

मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य के विकास में महती भूमिका निभा रहे हैं
हेमंत सोरेन झामुमो के सुप्रीमो सह झारखंड अलग आंदोलन में अग्रिम भूमिका निभाने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन के पुत्र हैं. हेमंत सोरेन दूसरी बार झारखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. हेमंत सोरेन पहली बार जुलाई 2013 में मुख्यमंत्री बने थे और दिसंबर 2014 तक इस पद पर रहे. वहीं, दूसरी बार उन्होंने 29 दिसंबर 2019 को झारखंड के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री के तौर पर वर्तमान में राज्य की कमान संभाल रहे हैं.
हेमंत सोरेन का का शैक्षणिक सफर
हेमंत सोरेन की शुरुआती शिक्षा बोकारो सेक्टर-4 स्थित सेंट्रल स्कूल से हुई. स्कूल में दोस्तों के बीच वह अपने ग्रुप के लीडर हुआ करते थे. 1989 में हेमंत सोरेन ने पटना के एमजी हाई स्कूल में 10वीं कक्षा में दाखिला लिया. पटना से ही उन्होंने मैट्रिक की पढ़ाई की. 1990 में उन्होंने बोर्ड की परीक्षा पास की. इसके बाद पटना विश्वविद्यालय से आईएससी 1994 में किया. इसके बाद हेमंत ने बीआईटी मेसरा (BIT Mesra) में इंजीनियरिंग में दाखिला लिया. हेमंत सोरेन, इंजीनियरिंग ड्राप आउट स्टूडेंट हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही जानते होंगे कि, हेमंत सोरेन अपनी इच्छा नहीं, बल्कि परिस्थितिवश राजनीति में आए हैं.
हेमंत सोरेन की राजनीतिक सफर
2003 में हेमंत सोरेन ने छात्र राजनीति में कदम रखा. फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वे झारखंड छात्र मोर्चा के अध्यक्ष बने. इसके बाद पहली बार उन्होंने 2005 में दुमका विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था, पर स्टीफन मरांडी से हार गये. इसके बाद पहली बार 23 दिसंबर 2009 को दुमका से वर्तमान विधानसभा के लिए विधायक चुने गए थे. हेमंत सोरेन अपनी इच्छा नहीं, बल्कि परिस्थितिवश राजनीति में आए हैं. दरअसल, हेमंत सोरेन के बडे़ भाई दुर्गा सोरेन की अचानक मृत्यु हो गई थी और पिता शिबू सोरेन का स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं चल रहा था. इसी वजह से हेमंत सोरेन की राजनीति में इंट्री हुई.
हेमंत सोरेन साल 2009 में ही संसद के उच्च सदन राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए, लेकिन जनवरी 2010 में उन्होंने सांसद के पद से इस्तीफा दे दिया और राज्य की अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार में डिप्टी CM बन गए. इसके बाद साल 2013 में पहली बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन उनका कार्यकाल दिसंबर 2014 तक ही चला, जिसके बाद हेमंत सोरेन ने बीते पांच सालों में पार्टी के अंदर अपनी पकड़ बनाई और वह दूसरी बार 29 दिसंबर, 2019 को राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री के तौर पर झारखंड के मुख्यमंत्री बने और अभी तक वह राज्य का कमान संभाल रहे हैं.
इंजीनियर बनना चाहते थे हेमंत सोरेन
आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि राजनीतिक बुलंदियों पर पहुंचे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इंजीनियर बनना चाहते थे. उनका शौक फोटोग्राफी और पेंटिंग था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनी कि उन्हें राजनीति की रपटीली राह पर चलना पड़ा. 10 अगस्त 1975 को जन्मे हेमंत सोरेन झारखंड की सबसे बड़ी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा का नेतृत्व संभालने आगे आए. आरंभ में उनकी क्षमता को लेकर राजनीतिक गलियारे में सवाल भी उठे, लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर हेमंत सोरेन ने साबित कर दिया कि वे राजनीतिक रेस के बड़े खिलाड़ी हैं.
