Ranchi: छात्रों के आंदोलन को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू के बयान पर कांग्रेस ने पलटवार किया है. प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने आरोप लगाया कि भाजपा ने छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने के नाम पर केवल दिखावा किया और इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की.
सोनाल शांति ने कहा कि जब छात्र अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव कर रहे थे, उस समय भाजपा के नेता छात्रों के साथ खड़े होने के बजाय अलग कार्यक्रम में व्यस्त थे. उन्होंने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी, आदित्य साहू समेत भाजपा के विधायकों ने मुख्यमंत्री आवास घेराव का कार्यक्रम किया और बाद में छात्रों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की गई.
भाजपा विधायक सदन में छात्रों की आवाज क्यों नहीं उठाते?
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि जनता ने भाजपा के विधायकों को विधानसभा में अपनी बात रखने के लिए चुना है. लेकिन छात्रों के विधानसभा घेराव के दौरान भाजपा नेताओं की भूमिका पर सवाल उठे हैं. उन्होंने कहा कि इससे साफ है कि भाजपा छात्रों के मुद्दे को लेकर गंभीर होने के बजाय राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रही है.उन्होंने जेपीएससी मामले की सीबीआई जांच की भाजपा की मांग पर भी सवाल उठाया. सोनाल शांति ने कहा कि सीबीआई देश में कई मामलों की जांच कर रही है, लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी को दोषी नहीं माना जा सकता.
लाठीचार्ज समाधान नहीं, संवाद से निकलेगा रास्ता
सोनाल शांति ने कहा कि कांग्रेस मानती है कि छात्रों की समस्याओं का समाधान लाठीचार्ज या हिंसा से नहीं, बल्कि बातचीत से होना चाहिए. सरकार और छात्रों के बीच संवाद के जरिए रास्ता निकाला जाना चाहिए. उन्होंने भाजपा पर आंदोलन को राजनीतिक और सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड के छात्र अपने बेहतर भविष्य के लिए आंदोलन कर रहे हैं और उन्हें राजनीतिक विवाद में नहीं घसीटना चाहिए.
भाजपा से माफी मांगने की मांग
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आंदोलनकारी छात्रों ने खुद आरोप लगाया है कि कुछ असामाजिक तत्व आंदोलन को बदनाम करने के लिए उसमें शामिल हुए और प्रशासन पर हमला किया. उन्होंने आदित्य साहू से छात्रों से माफी मांगने की मांग की.सोनाल शांति ने कहा कि भाजपा का झारखंड बंद भी जनता के बीच प्रभाव नहीं छोड़ सका. उन्होंने भाजपा पर तंज कसते हुए कहा कि छात्रों के आंदोलन के मामले में पार्टी को ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ वाली स्थिति का सामना करना पड़ रहा है.
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