Newswave Desk: परिसीमन को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच तमिलनाडु विधानसभा ने बुधवार, 12 अगस्त 2026 को लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को स्थायी रूप से फ्रीज रखने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया. प्रस्ताव मुख्यमंत्री विजय की ओर से पेश किया गया.
क्या है पूरा मामला?
भारत में लोकसभा की सीटों का राज्यवार आवंटन लंबे समय से स्थिर है. 1976 के 42वें संविधान संशोधन के बाद सीटों के राज्यवार पुनर्वितरण पर रोक लगाई गई थी. 2001 के 84वें संविधान संशोधन के जरिए इस रोक को 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक बढ़ाया गया. अब आगामी परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों में चिंता है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण होने पर उन राज्यों की लोकसभा में हिस्सेदारी कम हो सकती है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है.
तमिलनाडु की मुख्य मांग
तमिलनाडु विधानसभा के प्रस्ताव में कहा गया है कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों को फ्रीज रखा जाए. साथ ही लोकसभा और राज्यसभा के बीच सीटों का अनुपात 2.2:1 बनाए रखने की मांग की गई है.
543 सीटों का क्या होगा?
- वर्तमान लोकसभा सीटें 543
- तमिलनाडु की सीटें 39
- मांग 543 सीटों को फ्रीज रखा जाए
- मुख्य विवाद परिसीमन और सीटों का राज्यवार पुनर्वितरण
- प्रस्ताव तमिलनाडु विधानसभा में पारित
- मुख्य चिंता दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर संभावित असर
दक्षिणी राज्यों को क्यों है चिंता?
दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने परिवार नियोजन और जनसंख्या नियंत्रण के क्षेत्र में राष्ट्रीय लक्ष्यों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन किया है. यदि भविष्य में अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अधिक लोकसभा सीटें मिलती हैं, तो जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों की संसद में राजनीतिक हिस्सेदारी तुलनात्मक रूप से कम हो सकती है.
परिसीमन क्या है?
परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के पुनर्निर्धारण से है. वर्तमान व्यवस्था के तहत अगली बड़ी परिसीमन प्रक्रिया 2027 की जनगणना के बाद होने की संवैधानिक संभावना है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के जून 2026 के कार्यपत्र में भी बताया गया है कि राज्यवार सीट आवंटन लंबे समय से स्थिर है और अगली परिसीमन प्रक्रिया इसे बदल सकती है.
प्रस्ताव का मतलब अभी सीटें फ्रीज होना नहीं
यह महत्वपूर्ण है कि तमिलनाडु विधानसभा का प्रस्ताव केंद्र सरकार या संसद द्वारा पूरे देश के लिए लागू किया गया कानून नहीं है. यह केंद्र से की गई राजनीतिक और संवैधानिक मांग है. मौजूदा सीट व्यवस्था में बदलाव या उसे स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए आगे केंद्र और संसद की संवैधानिक प्रक्रिया आवश्यक होगी. तमिलनाडु का यह प्रस्ताव परिसीमन को लेकर दक्षिणी राज्यों की चिंताओं को सामने लाता है. अब मुख्य सवाल यह है कि केंद्र सरकार 543 सीटों को बनाए रखने की मांग पर क्या रुख अपनाती है और आगामी परिसीमन में राज्यों के प्रतिनिधित्व का संतुलन किस तरह तय किया जाता है.
