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हजारीबाग में जल्द शुरू होगा ब्लड कंपोनेंट सेंटर, मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

Hazaribagh : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक में जल्द ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन स्थापित की जाएगी....

Blood Component Center

Hazaribagh : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर स्थित ब्लड बैंक में जल्द ही ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन स्थापित की जाएगी. करीब एक करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली इस अत्याधुनिक मशीन को लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. मशीन के चालू होने के बाद हजारीबाग समेत आसपास के जिलों के मरीजों को रक्त के अलग-अलग कंपोनेंट के लिए रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी.

जानकारी के अनुसार, ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन रक्त को रेड ब्लड सेल्स, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा जैसे अलग-अलग हिस्सों में विभाजित करती है. इससे एक यूनिट रक्त का उपयोग कई मरीजों के उपचार में किया जा सकता है. साथ ही मरीज को आवश्यकता के अनुसार संबंधित कंपोनेंट उपलब्ध कराया जा सकेगा. इससे अनावश्यक रूप से पूरा रक्त चढ़ाने की जरूरत कम होगी और रक्त की उपयोगिता भी बढ़ेगी.

तीन साल से भवन तैयार, अब दूर होगी तकनीकी अड़चन

मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर में मई 2023 में DMFT फंड से करीब 24 करोड़ रुपये की लागत से ब्लड बैंक का नया भवन तैयार किया गया था. इसमें रक्त संरक्षण के साथ ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन लगाने की भी योजना थी. हालांकि भवन तैयार होने के बाद विशेषज्ञों के निरीक्षण में मशीन स्थापित करने के लिए निर्धारित मानकों के अनुरूप आधारभूत संरचना में कुछ कमियां पाई गई थीं. इसके कारण मशीन की स्थापना करीब तीन वर्षों तक नहीं हो सकी.

अब आवश्यक बदलाव कर आधारभूत संरचना को निर्धारित मानकों के अनुरूप तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है. प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कमियों को दूर कर जल्द से जल्द सुविधा शुरू की जाए.

लाइसेंस के बाद शुरू होगी सेवा

सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने इस संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष सह DC को पत्र भेजकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने का अनुरोध किया है. योजना के अनुसार, आधारभूत संरचना तैयार होने के बाद केंद्र सरकार के ऑनलाइन राष्ट्रीय औषधि लाइसेंसिंग प्रणाली के पोर्टल पर लाइसेंस के लिए आवेदन किया जाएगा. इसके बाद विभागीय टीम स्थल का भौतिक निरीक्षण करेगी.

निरीक्षण में निर्धारित मानक पूरे पाए जाने पर लाइसेंस जारी किया जाएगा और इसके बाद मशीन स्थापित कर सेवा शुरू की जाएगी. मशीन संचालन के लिए आवश्यक कर्मियों का प्रशिक्षण भी पहले ही पूरा किया जा चुका है. प्रशासन को उम्मीद है कि वर्ष के अंत तक प्रमंडलीय क्षेत्र के लोगों को इस सुविधा का लाभ मिलने लगेगा.

डेंगू, थैलेसीमिया और कैंसर मरीजों को विशेष लाभ

ब्लड कंपोनेंट सेंटर शुरू होने से खास तौर पर डेंगू, थैलेसीमिया, कैंसर और गंभीर रूप से बीमार मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. जरूरत के अनुसार प्लेटलेट्स, प्लाज्मा और रेड ब्लड सेल्स स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होने से समय और खर्च दोनों की बचत होगी. फिलहाल अलग-अलग कंपोनेंट की जरूरत पड़ने पर मरीजों को रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है. स्थानीय स्तर पर यह सुविधा उपलब्ध होने से आपात स्थिति में मरीजों को समय पर आवश्यक रक्त कंपोनेंट मिल सकेगा और उपचार में भी तेजी आएगी.

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