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हजारीबाग : छह साल से पावना अटका, DSE कार्यालय में फूट-फूटकर रोया बुजुर्ग दंपती

Hazaribagh : जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय हजारीबाग में सरकारी व्यवस्था की कथित संवेदनहीनता की तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब 66 वर्षीय...

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Hazaribagh : जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय हजारीबाग में सरकारी व्यवस्था की कथित संवेदनहीनता की तस्वीर उस वक्त सामने आई, जब 66 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक मो. शौकत अली अपनी पत्नी रजिया खातून के साथ कार्यालय परिसर में फूट-फूटकर रोते नजर आए. छह वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए शिक्षक अपने बकाया सेवानिवृत्ति पावना के भुगतान के लिए गोड्डा से हजारीबाग पहुंचे हैं. लेकिन पांच दिनों से कार्यालयों की चौखट नापने के बावजूद उन्हें भुगतान के बजाय केवल आश्वासन ही मिल रहा था.

बीमार और आर्थिक तंगी से जूझ रहा बुजुर्ग दंपती हजारीबाग में किराए के कमरे में रहकर लगातार कार्यालय का चक्कर काट रहा है. कभी फर्श पर बैठकर तो कभी दीवार का सहारा लेकर अपनी फरियाद सुनाने की कोशिश करते दंपती की आंखों से छलकते आंसू व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते रहे.

2020 में हुए सेवानिवृत्त, अब तक नहीं मिला पूरा पावना

मो. शौकत अली राजकीय बुनियादी विद्यालय पकड़िया, पथरगामा-2, गोड्डा में प्रधानाध्यापक सह सचिव के पद पर कार्यरत थे. वर्ष 2020 में सेवानिवृत्त होने के बाद भी उनके सेवानिवृत्ति संबंधी पावना का निपटारा अब तक नहीं हो सका है. बताया गया कि DSE गोड्डा की ओर से उनकी मूल सेवा पुस्तिका और अंतिम वेतन प्रमाण पत्र हजारीबाग भेजा गया था. इसके बावजूद संबंधित फाइल पर अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं हो सकी.

अधिकारी के निर्देश के बाद भी फाइल रही अटकी

सूत्रों के अनुसार, DSE आकाश कुमार ने संबंधित कर्मियों को मामले में आवश्यक कार्रवाई का मौखिक निर्देश भी दिया था. इसके बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ी. बुजुर्ग शिक्षक और उनकी पत्नी पांच दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाते रहे. दंपती का आरोप है कि उनकी समस्या सुनने के बजाय उन्हें लगातार इंतजार करने को कहा जाता रहा. उनकी स्थिति देखकर कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों में भी नाराजगी देखी गई.

मीडिया पहुंची तो ‘गुम’ फाइल अचानक मिल गई

मामले में उस समय नया मोड़ आया, जब पत्रकारों ने कार्यालय के संबंधित कर्मियों से शौकत अली की फाइल के बारे में जानकारी लेनी शुरू की. जिस फाइल के बारे में अब तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही थी, वह अचानक बरामद हो गई और उस पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात सामने आई. इस घटनाक्रम ने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि फाइल कार्यालय में ही मौजूद थी तो बुजुर्ग शिक्षक को पांच दिनों तक क्यों भटकना पड़ा और अधिकारी के निर्देश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पूर्व कर्मी भी आठ महीने से लगा रहे चक्कर

कार्यालय परिसर में मौजूद लोगों के अनुसार, यह केवल एक सेवानिवृत्त शिक्षक का मामला नहीं है. कई सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारी अपने बकाया भुगतान के लिए कार्यालय का चक्कर लगाते देखे जाते हैं. इसी कार्यालय के पूर्व कर्मी सुदर्शन प्रसाद केशरी भी पिछले करीब आठ महीनों से अपने सेवानिवृत्ति भुगतान के लिए कार्यालय की दौड़ लगा रहे हैं. कभी दूसरों की फाइलों पर काम करने वाले पूर्व कर्मी को आज अपनी ही फाइल के लिए भटकना पड़ रहा है.

सवालों के घेरे में कार्यसंस्कृति

मो. शौकत अली का मामला अब महज एक सेवानिवृत्त शिक्षक के भुगतान का मामला नहीं रह गया है. यह सरकारी कार्यालयों में फाइलों के निस्तारण, जवाबदेही और संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है. छह साल से सेवानिवृत्त शिक्षक अपने हक के भुगतान के लिए इंतजार करता रहा, अधिकारी के निर्देश के बावजूद फाइल आगे नहीं बढ़ी और मीडिया के पहुंचते ही कार्रवाई शुरू हो गई-तो क्या बिना दबाव के आम फरियादी की फाइल आगे नहीं बढ़ सकती? बुजुर्ग दंपती की आंखों से निकले आंसू इस सवाल का जवाब मांग रहे हैं कि आखिर सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनका वैधानिक हक पाने के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा और इतनी जिल्लत क्यों झेलनी पड़ती है.

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