Hazaribagh: शहर का झील परिसर हो, मटवारी मैदान, संत कोलंबा कॉलेज मैदान, हजारीबाग स्टेडियम या अन्य सार्वजनिक मैदान. हर जगह अब बदलाव की बयार साफ दिखाई दे रही है. लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर पहले से कहीं अधिक जागरूक हो गए हैं. अधेड़ और बुजुर्ग सुबह-शाम व्यायाम करते हुए युवाओं से अधिक पसीना बहा रहे हैं, ताकि खुद को फिट रख सकें.
सुबह 4 बजे से शुरू हो जाती है हलचल
सुबह 4 बजते ही खासकर हजारीबाग झील परिसर में लोगों की भीड़ जुटने लगती है. झील का चक्कर लगाने वालों की संख्या हैरान कर देती है. परिसर में लोग अलग-अलग तरीके से खुद को फिट रखने की कोशिश करते नजर आते हैं और उन्हें देखकर हर कोई जोश से भर उठता है. खास बात यह है कि इनमें 85 वर्ष तक के बुजुर्ग भी शामिल हैं.

बुजुर्गों का स्टैमिना बना प्रेरणा
कई बुजुर्ग पूरे झील के लगभग ढाई किलोमीटर के दायरे का कई चक्कर लगाते हैं और उसके बाद ओपन जिम में भी पसीना बहाते हैं. 85 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक केदार नारायण सिंह आधे घंटे तक ओपन जिम की मशीनों का इस्तेमाल करते हुए योग की विभिन्न क्रियाएं करते हैं. इस उम्र में उनका स्टैमिना देखकर लोग हैरान रह जाते हैं.
वहीं मुस्लिम समाज की एक बुजुर्ग महिला भी हर मशीन का इस्तेमाल करती नजर आती हैं और लोग उनका उत्साह बढ़ाते हैं. 70 प्लस उम्र के कई लोग नियमित व्यायाम कर रहे हैं. इनमें 89 से 92 तक हजारीबाग सदर थाना के प्रभारी रहे अशोक कुमार भी शामिल हैं. वे झील का कई चक्कर लगाने के बाद ओपन जिम में अलग-अलग मशीनों पर अभ्यास करते हैं और आज भी युवाओं के मुकाबले अधिक फिट नजर आते हैं.
Also Read: हजारीबाग: दनुआ घाटी में भीषण सड़क हादसा, आपस में टकराए 10 वाहन, मची चीख-पुकार
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
झील परिसर और ओपन जिम में मुस्लिम महिलाओं की संख्या में भी जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. यह समाज में बदलती सोच और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का संकेत माना जा रहा है.
युवाओं में अब भी चिंता की स्थिति
हालांकि किशोर और युवाओं का एक बड़ा वर्ग अब भी अपने स्वास्थ्य के प्रति गंभीर नहीं दिख रहा है. देर रात तक जागना, सुबह देर तक सोना और मोबाइल में अधिक समय बिताने के कारण वे अधेड़ और बुजुर्गों की तुलना में अधिक तनाव और शारीरिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं.
