Ranchi: झारखंड में बहुचर्चित शराब घोटाला मामले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) एक साल के बाद एक बार फिर पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए एसीबी ने तत्कालीन उत्पाद एवं मद्य निषेध सचिव विनय कुमार चौबे के करीबियों और विभागीय अधिकारियों को पूछताछ के लिए समन भेजा है. एसीबी ने पूर्व उत्पाद आयुक्त अमित प्रकाश, छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुण पति त्रिपाठी समेत कई अधिकारियों और प्राइवेट एजेंसियों के प्रतिनिधियों को चार और छह अगस्त को हाजिर होने का निर्देश दिया है. कल यानि मंगलवार से पूछताछ का सिलसिला शुरू हो जाएगा.
चार और छह अगस्त को होगी कड़ाई से पूछताछ:
ACB ने मामले में शामिल संदिग्धों का सिलसिलेवार बयान दर्ज करने के लिए उन्हें अलग-अलग तारीखों पर तलब किया है.
चार अगस्त (मंगलवार):
– अमित प्रकाश: पूर्व उत्पाद आयुक्त
– गजेंद्र सिंह: तत्कालीन संयुक्त उत्पाद आयुक्त
– सुधीर कुमार दास: जेएसबीसीएल के महाप्रबंधक (वित्त)
छह अगस्त (गुरुवार):
– अरुण पति त्रिपाठी: छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के पूर्व एमडी सह विशेष सचिव (छत्तीसगढ़ आबकारी)
– अरुण कुमार सिंह: सीईओ, नेक्सजेन सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
– श्यामजी शरण: स्थानीय प्रतिनिधि, मैनपावर सप्लाई एजेंसी मेसर्स विजन हॉस्पिटालिटी प्राइवेट लिमिटेड
टेंडर प्रक्रिया, बैंक गारंटी और वित्तीय साक्ष्यों की हो रही जांच:
– ACB की जांच टीम पूर्व में लागू की गई आबकारी (उत्पाद) नीति के तहत टेंडर से जुड़े हर बिंदु को खंगाल रही है.
– टेंडर की शर्तें और उनमें नियम बदलकर किए गए बदलाव.
– टेंडर प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों, संस्थाओं और कंपनियों की भूमिका
– फर्जी बैंक गारंटी, भुगतान के तरीके, राजस्व वसूली और वित्तीय दायित्वों से जुड़े दस्तावेज.
– एसीबी वर्तमान में उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान वित्तीय दस्तावेजों के साथ कर रही है. इसी कड़ी में इन अधिकारियों से आमने-सामने पूछताछ की आवश्यकता महसूस की गई है.
20 मई 2025 को दर्ज हुई थी पहली प्राथमिकी:
उल्लेखनीय है कि ACB ने शराब घोटाले में सबसे पहले 20 मई 2025 को ACB रांची थाना कांड संख्या 09/2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी. आरोप है कि पूर्व आबकारी नीति के दौरान पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी बैंक गारंटी जमा कराने वाली अयोग्य कंपनियों को मैनपावर आपूर्ति का ठेका दिया गया. इस फर्जीवाड़े के कारण राज्य सरकार को करीब 38 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ था.

IAS विनय चौबे की गिरफ्तारी और वर्तमान स्थिति:
प्राथमिकी दर्ज होने के दिन (20 मई 2025) ही ACB ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे तत्कालीन संयुक्त आयुक्त गजेंद्र सिंह और प्लेसमेंट एजेंसी मेसर्स मार्शन इनोवेटिव के प्रतिनिधि नीरज कुमार सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. विनय कुमार चौबे 20 मई 2025 से ही न्यायिक हिरासत में थे हालांकि, शराब घोटाला मामले में समय पर चार्जशीट दाखिल न होने के कारण उन्हें तकनीकी रूप से जमानत मिल गई थी, लेकिन वे वन भूमि घोटाला मामले में जेल में ही बंद रहे हाल ही में उन्हें वन भूमि मामले में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली है. अब एसीबी द्वारा अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधियों को समन भेजे जाने से शराब घोटाला मामले में नए मोड़ आने और शिकंजा और कसने की पूरी संभावना है.
