रांची: झारखंड में बजट सत्र चल रहा है. सत्र 18 मार्च तक चलेगा. करीब एक महीने चलने वाले इस सत्र में कई बार सत्ता और विपक्ष को आपस में भिड़ते देखा गया. जिस सदन में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य या किसानों पर बात होनी चाहिए, वहां अनर्गल बातों पर एक-दूसरे से भिड़ते देखा जा रहा है. एक बार तो विपक्ष के विधायक तिवारी महतो को स्पीकर की तरफ से मार्शल आउट भी कराया गया. विधायक सदन में अपने क्षेत्र की परेशानियों को लेकर जाते तो हैं, लेकिन सदन में हंगामा कुछ और बात को लेकर हो जा रहा है. कई बार सदन में अनर्गल बातों पर बहस करते देखा गया. बीते दिनों सत्ता और विपक्ष आपस में रामनवमी में डीजे बजाने को लेकर भिड़ते दिखे. मामला सदन से लेकर अब बाहर राजनीतिक गलियारों का मुद्दा बना हुआ है.

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जानें कैसी-कैसी बातों पर बहस करता दिखा सदन
26 मार्च को देश भर में रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा. झारखंड सरकार की तरफ से रामनवमी के दिन डीजे बजाने को लेकर रोक लगा दी गई है. जिसे लेकर राजनीति चरम पर है. सदन में विपक्ष यानी बीजेपी की तरफ से इसे मुद्दा बनाया गया. सरकार पर दबाव डाला गया कि रामनवमी के दिन डीजे बजाने की अनुमति दी जाए. लेकिन सरकार की तरफ से इस डिमांड को नहीं माना जा रहा है. इस मामले को लेकर नेता प्रतिपक्ष और सत्ता पक्ष आपस में भिड़ते दिखे.
बाबूलाल मरांडी ने दो नौकरशाहों के बीच कथित तौर पर वायरल ऑडियो का मुद्दा उठाया. जबकि यह ऑडियो दो अधिकारियों के बीच निजी बातचीत का है. और रिकॉर्ड भी दोनों अधिकारियों में से एक अधिकारी कर रहे थे.
विधायक जयराम महतो ने राज्य में सचिव स्तर के अधिकारी के निजी आवासों में चल रहे मेडिकल सेंटर का मुद्दा उठाया. हालांकि उनकी बातों को अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने किसी भी रूप में गंभीरता से नहीं लिया.
इसी तरह जयराम महतो ने सीएम के धनबाद में दिए एक बयान का हवाला देकर सदन के समय को बर्बाद करने की कोशिश की. मामला था कि मुख्यमंत्री ने अपने दौरे में कहा था कि कोई भी निजी संस्थान अगर झारखंड के स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देते हैं तो उस पर वे लोग कब्जा कर लें. हालांकि सत्ता पक्ष की ओर से इसका विरोध किया गया. संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है. जिसे देखते हुए विधानसभा स्पीकर ने इस बात को सत्र की कार्यवाही की प्रोसीडिंग से हटाने का निर्देश दिया.
सत्र में श्रम, नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग और उद्योग विभाग के अनुदान मांगों पर पक्ष-विपक्ष के बीच चर्चा चल रही थी. उस दौरान राजद विधायक दल के नेता सुरेश पासवान ने ऐसी बातें कीं, जिन्हें सुनकर साफ था कि उनका इन अनुदान मांगों से कोई संबंध नहीं है.
उमाकांत रजक अपने चंदनकियारी विधानसभा की बातों को न रखकर बोकारो की एक जमीन की मापी और अतिक्रमण का मुद्दा उठाते दिखे. जिससे विकास की योजनाओं का कोई सरोकार नहीं था. इतना ही नहीं, इन बातों की वजह से सदन का कीमती वक्त जाया हुआ, क्योंकि मामला कोर्ट में है और इसमें सरकार की तरफ से कुछ नहीं किया जा सकता.

