रांची: चतरा जिले में भले ही नक्सली घटना में कमी आई लेकिन प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीपीसी) का सुप्रीमो ब्रजेश गंझू सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी पहेली बन गया है. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और झारखंड पुलिस की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शीर्ष पर रहने वाला ब्रजेश गंझू लंबे समय से फरार है. ताज्जुब की बात यह है, कि मगध और आम्रपाली कोल परियोजनाओं में करोड़ों रुपये की टेरर फंडिंग के इस मुख्य आरोपी के वर्तमान ठिकाने के बारे में न तो केंद्रीय एजेंसी को कोई सुराग मिल रहा है और न ही राज्य पुलिस को.

भूमिगत हुआ सुप्रीमो, बदला संगठन का नेतृत्व:
ब्रजेश गंझू का प्रभाव क्षेत्र मुख्य रूप से पलामू, लातेहार, चतरा और रांची का खलारी इलाका रहा है. इन क्षेत्रों में वह लंबे समय तक सक्रिय रहा, लेकिन पिछले कुछ समय से वह पूरी तरह भूमिगत हो गया है. उसकी गैर-मौजूदगी में संगठन की कमान में भी बदलाव देखे गए हैं. ब्रजेश की अनुपस्थिति में टीपीसी का रिजनल कमांडर आक्रमण गंझू लेवी वसूली और अन्य उग्रवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था.आक्रमण गंझू की गिरफ्तारी के बाद अब संगठन की कमान शशिकांत गंझू के हाथों में है. सूचना के अनुसार, शशिकांत के नेतृत्व में लगभग 15 सक्रिय उग्रवादियों का दस्ता क्षेत्र में सक्रिय है.
इनाम की भारी भरकम राशि भी बेअसर:
ब्रजेश गंझू की गिरफ्तारी के लिए जांच एजेंसियों ने भारी इनाम की घोषणा कर रखी है, फिर भी वह पुलिस की गिरफ्त से दूर है.ब्रजेश पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. केंद्रीय एजेंसी ने उसकी सूचना देने वाले को पांच लाख रुपये देने का ऐलान किया है.
टेरर फंडिंग मामले का है मुख्य आरोपी:
मगध और आम्रपाली कोल परियोजना में लेवी के जरिए टेरर फंडिंग मामले की जांच कर रही एनआईए के लिए ब्रजेश का पकड़ा जाना बेहद जरूरी है. इस मामले के चार मुख्य आरोपियों मुकेश गंझू पुलिस के समक्ष सरेंडर कर चुका है.भीखन गंझू पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है.आक्रमण गंझू पुलिस की गिरफ्त में है. जबकि ब्रजेश गंझू का लंबे समय तक फरार रहना राज्य में टेरर फंडिंग के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने की राह में एक बड़ा रोड़ा है.

