गिरिडीह: जिले की तीसरी थाना क्षेत्र अंतर्गत चंडली गांव में वन विभाग की जमीन पर वर्षों से अवैध पत्थर खनन का संगठित और सुनियोजित कारोबार जारी है. स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों के अनुसार, इस अवैध खनन से प्रतिदिन लगभग 40 हाइवा (भारी वाहन) पत्थर की निकासी की जा रही है. इतने बड़े पैमाने पर खनन के बावजूद प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
इन लोगों पर मुख्य रूप से आरोप
ग्रामीणों के मुताबिक इस पूरे अवैध कारोबार में दो लोगों की प्रमुख भूमिका सामने आ रही है—
- पप्पू पासवान, निवासी करकुट्टा वार्ड नंबर 11, पोस्ट बारगोड्डा, थाना डोमचांच, जिला कोडरमा. इनके पिता बाबूलाल पासवान पूर्व में वन विभाग में कार्यरत थे और वर्ष 2019 में सेवानिवृत्त हुए हैं.
- वहीं दूसरा नाम मनोज यादव का बताया जा रहा है, जो स्थानीय निवासी है.
- तीसरा नाम जन्नत अंसारी है जो महेशमरवा गांव का निवासी है. आरोप है कि तीनो मिलकर वन विभाग की भूमि का अवैध दोहन कर बड़े पैमाने पर पत्थर खनन करा रहे हैं.
दिन-रात जारी खनन, बेखौफ दौड़ रहे हाइवा
ग्रामीणों का कहना है कि खनन कार्य दिन-रात चलता है और भारी संख्या में हाइवा वाहनों की आवाजाही से गांव की सड़कों की हालत खराब हो गई है. रात के समय तेज रफ्तार में चलने वाले वाहनों से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है.
कानून का खुला उल्लंघन: कौन-कौन सी धाराएं लागू?
इस तरह का अवैध खनन कई केंद्रीय और राज्य कानूनों का सीधा उल्लंघन है. विशेषज्ञों के अनुसार इस मामले में निम्न धाराएं लागू हो सकती हैं:
1. खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act)
धारा 4(1A): बिना वैध लीज/अनुमति के खनन करना पूर्णतः अवैध
धारा 21: अवैध खनन पर जुर्माना और कारावास का प्रावधान
दोषी पर खनिज की कीमत और जुर्माने की वसूली भी की जा सकती है.
2. भारतीय वन अधिनियम, 1927 (Indian Forest Act)
धारा 26: आरक्षित वन क्षेत्र में अतिक्रमण और संसाधनों का दोहन दंडनीय अपराध
धारा 33: संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई
3. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
बिना पर्यावरणीय स्वीकृति (EC) खनन करना गैरकानूनी
उल्लंघन पर जेल और भारी जुर्माना दोनों का प्रावधान
4. भारतीय दंड संहिता (IPC)
धारा 379: चोरी (सरकारी संपत्ति/खनिज की चोरी)
धारा 414: चोरी के माल की ढुलाई/छुपाने में संलिप्तता
धारा 120B: आपराधिक साजिश
सरकार को भारी राजस्व नुकसान
प्रतिदिन 40 हाइवा पत्थर की अवैध निकासी से सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है. यदि इस अवैध कारोबार की अवधि को जोड़ा जाए, तो यह नुकसान करोड़ों रुपये तक पहुंच सकता है. बिना रॉयल्टी और वैध कागजात के खनन सीधा राजस्व चोरी है.
पर्यावरण पर गंभीर असर
- अवैध खनन के कारण क्षेत्र में पर्यावरणीय असंतुलन तेजी से बढ़ रहा है. जैसे-
- पेड़ों की अंधाधुंध कटाई
- जमीन का क्षरण और गड्ढों का निर्माण
- धूल प्रदूषण से लोगों में सांस संबंधी समस्याएं
- जल स्रोतों पर प्रतिकूल प्रभाव
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस अवैध खनन की जानकारी संबंधित विभागों और प्रशासन को होने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है. इससे प्रशासनिक निष्क्रियता या संभावित मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है.
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
- अवैध खनन पर तत्काल रोक लगाई जाए.
- संबंधित आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज कर सख्त कार्रवाई हो.
- खनन स्थल पर छापेमारी कर मशीनों और वाहनों को जब्त किया जाए.
- पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.
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