News Desk : बिहार की राजनीति में 14 अप्रैल 2026 को बड़ा बदलाव देखने को मिला जब सम्राट चौधरी को भाजपा विधायक दल का नेता चुना गया और मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया. नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद यह बदलाव संभव हुआ, जिसने राज्य की राजनीति में लंबे समय से चल रहे समीकरणों को बदल दिया. बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी को सीधे मुख्यमंत्री पद मिला है, जबकि इससे पहले पार्टी सत्ता में हिस्सेदार तो रही, लेकिन शीर्ष पद तक नहीं पहुंच पाई थी.
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दक्षिण भारत के कई राज्य अब भी BJP के लिए चुनौती
जहां एक ओर बिहार में भाजपा ने नया इतिहास रचा है, वहीं देश के कई राज्य ऐसे हैं जहां पार्टी अब तक मुख्यमंत्री पद हासिल नहीं कर पाई है. दक्षिण भारत में केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में क्षेत्रीय और गठबंधन की राजनीति का दबदबा है. केरल में लेफ्ट और कांग्रेस गठबंधन की मजबूत पकड़ है, जबकि तमिलनाडु में द्रविड़ दलों का प्रभाव बना हुआ है. इसी तरह तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में भी भाजपा को अभी तक नेतृत्व की भूमिका नहीं मिल सकी है.
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पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में भी सीमित रही पकड़
पश्चिम बंगाल में भाजपा ने पिछले कुछ चुनावों में अपनी ताकत जरूर बढ़ाई है, लेकिन ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार को चुनौती देने में सफल नहीं हो पाई. वहीं मिजोरम, मेघालय और नागालैंड जैसे राज्यों में भाजपा गठबंधन का हिस्सा जरूर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री पद क्षेत्रीय दलों के पास ही रहा है. सिक्किम में भी स्थानीय पार्टियों का वर्चस्व कायम है, जिससे भाजपा अभी तक वहां मजबूत स्थिति नहीं बना पाई है.
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पंजाब और जम्मू-कश्मीर में भी नहीं मिला नेतृत्व का मौका
पंजाब में भाजपा लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल के साथ गठबंधन में रही, लेकिन मुख्यमंत्री पद हमेशा सहयोगी दल के पास ही रहा. वहीं जम्मू-कश्मीर में भी भाजपा ने सरकार में भागीदारी की, लेकिन नेतृत्व उसके हाथ में नहीं आया. ऐसे में बिहार में मिली यह सफलता पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, जो आने वाले समय में अन्य राज्यों की राजनीति को भी प्रभावित कर सकती है.
