EXCLUSIVE: स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट: सरेंडर कर चुके नक्सलियों को नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ

SAURAV SINGH रांची: झारखंड में मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की सख्ती बढ़...

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रांची: झारखंड में मुख्यधारा में लौटने वाले नक्सलियों के पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की सख्ती बढ़ गई है. हजारीबाग ओपन जेल में रह रहे 86 आत्मसर्पित नक्सलियों को उनके हक की सरकारी सुविधाएं और लाभ नहीं मिल पा रहे है. हाल ही में स्पेशल ब्रांच झारखंड द्वारा राज्य के सभी एसएसपी, एसपी को जारी किए गए एक महत्वपूर्ण पत्र में इस बात का खुलासा हुआ है.

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86 पूर्व नक्सलियों की समस्याओं का खुलासा

स्पेशल ब्रांच द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, हजारीबाग ओपन जेल में विभिन्न जिलों के कुल 86 नक्सली रह रहे हैं. इनमें सबसे अधिक लातेहार से 23 और चाईबासा से 14 हैं. इनके अलावा चतरा से नौ दुमका से नौ, गिरिडीह पांच, लोहरदगा से छह, सराइकेला से छह, रांची से चार समेत कई अन्य जिलों के पूर्व नक्सली भी शामिल हैं. इन लोगों ने प्रशासन के समक्ष अपनी समस्याओं की एक लंबी सूची रखी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरेंडर नीति के क्रियान्वयन में स्थानीय स्तर पर भारी लापरवाही हो रही है.

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जाने क्या है पूर्व नक्सलियों का मुख्य शिकायतें और कमियां

– स्पेशल ब्रांच की रिपोर्ट में आठ प्रमुख समस्याओं का उल्लेख किया गया है.

– कई पूर्व नक्सलियों का आधार कार्ड या तो बना नहीं है या उसमें गलतियां हैं. इसके अभाव में उनके बैंक खाते नहीं खुल रहे हैं, जिससे उन्हें मिलने वाली आर्थिक सहायता रुकी हुई है. जिनमें लखन यादव और संतु भुइयां शामिल है.

– सरेंडर के समय किए गए वादे के बावजूद, कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में देरी हो रही है. साथ ही, उनके वकीलों के फीस का भुगतान भी समय पर नहीं किया जा रहा है. जिनमें दुर्योधन महतो, सर्वजीत यादव और खुदी मुंडा शामिल है.

– सरेंडर नीति के तहत मिलने वाली चार डिसमिल जमीन का आवंटन अधिकांश लोगों को अब तक नहीं हुआ है, इसके अलावा, प्रधानमंत्री आवास या गृह निर्माण सहायता राशि से भी कई लोग वंचित हैं. जिनमें वीरेंद्र यादव, किरण टुडू, कुलदीप गंझु, नवीन, मुकेश गंझु और प्रेमशिला शामिल है.

– पूर्व नक्सलियों के बच्चों के स्कूल नामांकन और पढ़ने का फीस के भुगतान में समस्या आ रही है. जिनमें जिनमें दुर्योधन महतो, नुनुचंद महतो, राधेश्याम कुमार, रामप्रसाद महतो, और खुदी मुंडा शामिल है.

– गंभीर बीमारी की स्थिति में सरकारी संस्थानों में मुफ्त इलाज की सुविधा भी सही तरीके से नहीं मिल रही है, जिनमें खुदी मुंडा शामिल है.

– योग्यता के अनुसार व्यावसायिक प्रशिक्षण नहीं मिल रहा है, जिनमें नुनुचंद महतो शामिल है.

– जीवन बीमा जैसी बुनियादी सुरक्षा भी प्रदान नहीं की गई है, जिनमें दुर्योधन महतो शामिल है.

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