palamu : बदलते दौर में पलामू के किसान पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं. पलामू जैसे कम बारिश वाले इलाकों में जहां टांड़ यानी अपलैंड जमीन खाली रह जाती है, वहां आंवले की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन और टिकाऊ विकल्प बनकर उभर रही है. पलामू जिले के चियांकि मे कई किसानो ने आंवले का पेड लगया हैं इससे इनकी आर्थिक आय मे काफी सुधार दिखाई पड़ता हैं
पौधे लगाने का सबसे सही समय
पलामू के किसान आंवले के फल सीधे बेचने के अलावा मुरब्बा, कैंडी और चूर्ण जैसे उत्पाद तैयार करके अपनी आय में कई गुना वृद्धि कर सकते हैं. आंवले की खेती के लिए बलुई दोमट या हल्की उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है, जिसका pH मान 6.5 से 8.5 के बीच होना चाहिए. खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था और समतलीकरण बेहद जरूरी है. पौधे लगाने का सबसे सही समय जुलाई से सितंबर के बीच यानी मानसून के दौरान होता है.
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे के अनुसार
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दिलीप पांडे के अनुसार, आंवले का बाग लगाने के लिए पौधरोपण से करीब एक महीना पहले एक-एक मीटर लंबाई, चौड़ाई और गहराई वाले गड्ढे तैयार किए जाते हैं, जिनमें मिट्टी और सड़ी गोबर की खाद का मिश्रण भरा जाता है. यदि किसान 6×6 मीटर की दूरी पर पौधे लगाते हैं तो एक एकड़ में लगभग 110 से 150 पौधे लगाए जा सकते हैं, जबकि 8×8 मीटर की दूरी रखने पर प्रति एकड़ करीब 60 से 65 पौधे लगते हैं.
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