Bokaro: बेरमो अनुमंडल अंतर्गत बोकारो थर्मल थाना क्षेत्र के गोविंदपुर बस्ती मंगलवार को एक अद्भुत और बेहद भावुक पल की गवाह बनी. करीब दो दशकों से लापता परशुराम महतो के अचानक घर लौट आने से पूरा गांव खुशी से सराबोर हो उठा. इतने लंबे समय बाद अपने लाल को वापस पाकर बस्ती में उत्सव जैसा माहौल बन गया, जहां ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया. इस मार्मिक घटनाक्रम की शुरुआत 20 वर्ष पूर्व 2007 में हुई थी, जब स्व. रेवतलाल महतो के पुत्र एवं कामेश्वर महतो के भाई परशुराम महतो अपने चार-पांच दोस्तों के साथ आजीविका कमाने राजस्थान गए थे. कुछ समय बाद उनके बाकी साथी तो गांव लौट आए, लेकिन परशुराम उनके साथ नहीं थे. साथियों के अनुसार वे कहीं गुम हो गए थे और काफी तलाश के बाद भी उनका कोई अता-पता नहीं चला. वक्त के साथ परशुराम के पिता का साया भी परिवार के सिर से उठ गया और समय बीतने के साथ ग्रामीणों ने उनके वापस आने की आस लगभग छोड़ दी थी.
पत्नी मालती देवी ने कहा- निष्ठा और सब्र का फल मिला
लेकिन उनकी धर्मपत्नी मालती देवी का विश्वास कभी नहीं डगमगाया. मंगलवार को जब परशुराम ने अचानक अपने घर के आंगन में कदम रखा, तो यह खबर पूरी बस्ती में आग की तरह फैल गई. 20 वर्षों के लंबे विछोह के बाद पति-पत्नी का मिलन देखकर हर किसी का कलेजा भर आया. इस अवसर पर गांव की महिलाओं की मौजूदगी में परशुराम ने अपनी पत्नी मालती देवी की सूनी मांग को दोबारा सिंदूर से भरकर इस क्षण को स्मरणीय और पवित्र बना दिया. सिंदूर सजते ही वहां उपस्थित सभी लोगों की आंखें नम हो गईं. ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं है. वहीं पत्नी मालती देवी ने गद्गद कंठ से कहा कि भगवान ने आखिरकार उनकी निष्ठा और सब्र का फल दे दिया. आज गोविंदपुर बस्ती में यह पुनर्मिलन प्रेम, आस्था और अटूट विश्वास की एक अनूठी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है.

