Click Here
Click Here
Click Here

सिर्फ संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहरा सकते- हाईकोर्ट ने इन चार कारणों से रद्द की पूर्व MLA पौलुस सुरीन और PLFI के जेठा कच्छप की उम्रकैद की सजा, पढ़ें पूरी रिपोर्ट 

विनीत आभा उपाध्याय Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में तोरपा के पूर्व विधायक पौलुस सुरीन और पीएलएफआई उग्रवादी संगठन...

Oplus_16908288

विनीत आभा उपाध्याय

Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक बेहद महत्वपूर्ण फैसले में तोरपा के पूर्व विधायक पौलुस सुरीन और पीएलएफआई उग्रवादी संगठन से जुड़े जेठा कच्छप को बड़ी राहत दी है. अदालत ने दोनों आरोपियों को दोहरे हत्याकांड और आपराधिक साजिश के मामले में बरी करते हुए ट्रायल कोर्ट के उम्रकैद के आदेश को पलट दिया है और दोनों को डबल मर्डर केस में बरी कर दिया है. दोनों आरोपियों की याचिका पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ में सुनवाई हुई. यह मामला 27 मई 2013 का है जब खूंटी जिले के कर्रा थाना क्षेत्र के तिरला गांव में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन पीएलएफआई के उग्रवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर भूषण सिंह और राम गोविंद सिंह की हत्या कर दी थी. जिसके बाद इस केस का ट्रायल पूरा होने के बाद छह अप्रैल 2024 को रांची की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने पूर्व विधायक पौलुस सुरीन को हत्या की साजिश रचने और जेठा कच्छप को हत्या व आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना था. इसके बाद 10 अप्रैल 2024 को दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. पौलुस सुरीन और जेठा कच्छप की ओर से हाईकोर्ट के वरीय अधिवक्ता बीएम त्रिपाठी, आर इस मजूमदार और मनोज कुमार चौबे ने पक्ष रखा.

हाईकोर्ट ने इन बिन्दुओ के आधार पर पलटा ट्रायल कोर्ट का फैसला:

– अपील पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पाया कि मुख्य गवाहों ने आरोपियों को गोली चलाते देखने का दावा किया था, लेकिन जिरह में सामने आया कि वे फायरिंग सुनकर घर के अंदर छिप गए थे. कोर्ट ने कहा कि 50 गज की दूरी से अंधाधुंध गोलीबारी के बीच उग्रवादियों को पहचानना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं था, खासकर तब जब दीवार पर गोलियों के 35 निशान मिले थे.

– एफआईआर के मुताबिक पूर्व विधायक ने कुछ अन्य ग्रामीणों के साथ मिलकर साजिश रची थी. जिन्हें ट्रायल कोर्ट पहले ही बरी कर चुका था. हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब सभी सह-आरोपी बरी हो चुके हैं तो अकेला व्यक्ति खुद के साथ साजिश नहीं रच सकता.

– जेठा कच्छप के धारा 164 के तहत दर्ज बयान को कोर्ट ने दोष-मुक्ति प्रकृति का माना क्योंकि उसमें खुद गोली चलाने की बात नहीं थी. साथ ही मजिस्ट्रेट के सामने बयान से पहले उसे सोचने का पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया था.

– पूर्व विधायक द्वारा मृतक को सीमेंट दुकान में धमकी देने के आरोप पर जांच अधिकारी ने न तो दुकानदार का बयान लिया और न ही किसी स्वतंत्र स्थानीय व्यक्ति से पुष्टि की. यह आरोप केवल मृतक के करीबियों के बयानों पर आधारित था. हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों को देखने और सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष दोनों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है. निचली अदालत का फैसला सिर्फ अनुमानों पर आधारित था.

add1
सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *