Ranchi: झारखंड के माइनर इरिगेशन (जल संसाधन) विभाग से जुड़े डेली वेजेस कर्मचारियों के पेंशनरी लाभ के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने विभागीय सचिव प्रशांत कुमार को फटकार लगाई और लोक अदालत के अवॉर्ड को लागू करते हुए याचिकाकर्ताओं को बकाया राशि 6 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश दिया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सचिव को कड़ी फटकार लगाते हुए पूछा कि आखिर अब तक अवॉर्ड का पालन क्यों नहीं किया गया. विभाग की ओर से 10 से 20 दिन का समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने अंतिम रूप से 10 जुलाई तक भुगतान करने का समय दिया है.
क्या है पूरा मामला
याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष रख रही अधिवक्ता राखी रानी ने बताया कि यह मामला उन कर्मचारियों से जुड़ा है, जो वर्षों तक डेली वेजेस पर कार्यरत रहे और बाद में चरणबद्ध तरीके से वर्ष 2011 तक नियमित किए गए. कर्मचारियों का कहना है कि नियमितीकरण के बाद उनकी पूर्व सेवा अवधि (डेली वेजेस अवधि) को पेंशन के लिए नहीं जोड़ा गया, जिसके कारण कई कर्मियों को पेंशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्हें न्यूनतम आवश्यक सेवा अवधि पूरी नहीं होने के आधार पर पेंशन से वंचित कर दिया गया.

पेंशन के लिए सेवा अवधि जोड़ने की मांग
इस संबंध में कर्मचारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि डेली वेजेस के रूप में की गई सेवा को कम से कम पेंशनरी लाभ के लिए गिना जाए. यह मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों में भी स्पष्ट किया जा चुका है कि ऐसी सेवा को पेंशन के लिए जोड़ा जा सकता है.
लोक अदालत में हुआ समझौता
मामला बाद में लोक अदालत में गया, जहां दोनों पक्षों के बीच समझौता हुआ. लोक अदालत ने अपने अवॉर्ड में स्पष्ट निर्देश दिया कि कर्मचारियों को पूरा पेंशनरी लाभ दिया जाए और अंतर राशि का भुगतान किया जाए. सुनवाई के दौरान विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने भी इस संबंध में अंडरटेकिंग दी.
अवॉर्ड के बावजूद नहीं हुआ पालन
इसके बावजूद विभाग द्वारा अवॉर्ड को लागू नहीं किया गया. इस पर याचिकाकर्ताओं ने अवमानना याचिका दाखिल की, लेकिन अदालत ने यह कहते हुए उसे सुनने से इनकार कर दिया कि लोक अदालत के अवॉर्ड पर कंटेम्प्ट नहीं चलाया जा सकता.
डिवीजन बेंच ने दिया स्पष्ट आदेश
इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने अवॉर्ड के अनुपालन के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की, जिसे सिंगल बेंच ने रेस जुडीकेटा के आधार पर खारिज कर दिया. इसके खिलाफ डिवीजन बेंच में लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) दायर की गई. डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए विभाग को स्पष्ट निर्देश दिया कि लोक अदालत के अवॉर्ड को लागू किया जाए और बकाया राशि का भुगतान अवॉर्ड की तिथि से लेकर वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत ब्याज के साथ किया जाए. अदालत ने यह भी माना कि विभाग ने जानबूझकर अवॉर्ड के अनुपालन में देरी की है.
दोबारा अवमानना याचिका सचिव और चीफ इंजीनियर तलब
इसके बावजूद विभाग द्वारा आदेश का पालन नहीं किए जाने पर पुनः अवमानना याचिका दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान विभाग की ओर से समय मांगा गया. अदालत ने 30 जून तक की समय सीमा तय की. फिर भी अनुपालन नहीं हुआ. जिसके बाद समय विस्तार के आग्रह को अदालत ने खारिज करते हुए जल संसाधन विभाग के सचिव प्रशांत कुमार और चीफ इंजीनियर को तलब किया. मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है.


