बोकारो: बोकारो में कानून का नहीं, बालू माफिया का राज है. नदी तट से ना सिर्फ बालू का खुलेआम उठाव हो रहा है, बल्कि स्थानांतरण भी किया जा रहा है. बालू माफिया की हिम्मत इससे समझी जा सकती है कि जिला प्रशासन भी इनपर कार्रवाई करने से हिचकती है. 18 फरवरी को बालू माफिया पर नकेल कसने को लेकर बोकारो डीसी ने एक समिति बनाई. समिति को निर्देश दिया गया है कि क्षेत्र में सघन जांच अभियान चलाकर अवैध खनन व अतिक्रमण पर रोक लगाई जाये. साथ ही प्रत्येक 15 दिनों के भीतर प्रगति प्रतिवेदन संबंधित प्राधिकारी को उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है.
बोकारो के भतुआ स्थित दामोदर नद क्षेत्र में अतिक्रमण व बालू के अवैध उत्खनन, परिवहन व भंडारण के खिलाफ प्रशासन ने कदम उठाते हुए, उपायुक्त अजय नाथ झा ने वन प्रमंडल पदाधिकारी बोकारो की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति गठित की. समिति में निदेशक डीपीएलआर, अपर समाहर्ता, जिला खनन पदाधिकारी, नगर पुलिस उपाधीक्षक व बीएसएल प्रबंधन की ओर से नामित सदस्य को शामिल किया गया. समिति के 45 दिन बीत जाने के बाद भी जमीन पर कुछ नहीं हुआ. इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि अधिकारी रिपोर्ट बनाने से बच रहे हैं.

भतुआ के बालू माफिया पर कार्रवाई करने को लेकर विभाग पहली बार रेस नहीं हुआ है. हर साल की यही कहानी है. 22 अप्रैल 2024 को तो ऐसी नौबत आ गयी थी कि कार्रवाई करने गयी बीएसएल व जिला खनन विभाग की टीम पर अवैध कारोबारियों ने हमला तक कर दिया था. झाड़ी में छिप कर या भाग कर टीम ने खुद को बचाया था. बाद में केस और मुकदमा का खेल हुआ, लेकिन घाट से बालू उठाया जाता रहा. इससे अवैध कारोबारियों की हिम्मत का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.
जिला में बालू के 07 घाट वैध हैं. इनमें से 02 बालू घाट गोमिया प्रखंड में 05 बालू घाट पेटरवार प्रखंड में हैं. कुल 140.12 हेक्टेयर क्षेत्र से बालू का वैध रूप से उठाव हो रहा है. बाकि, अन्य जगहों से बालू का उठाव अवैध रूप से हो रहा है. 17 फरवरी को ही विभाग ने चास प्रखंड के हरला थाना क्षेत्र के भतुआ में बड़ी कार्रवाई की थी. अवैध रूप से उत्खनन किये गये 166400 घनफीट मिट्टी व 221862 घनफीट बालू पर कार्रवाई की गयी. यहां से मिट्टी खोद कर जमीन में बड़ा गड्ढा बना दिया गया. इस पर विभाग ने संज्ञान लिया. लेकिन, मामला सिर्फ संज्ञान तक ही रह गया.
जिला में सिर्फ 07 बालू घाट वैध हैं. लेकिन, हर जगह से बालू का ना सिर्फ अवैध उठाव हो रहा है, बल्कि गुणवत्ता का ख्याल भी रखा जाता है. लगभग सभी प्रखंड में बालू का उठाव खुलेआम हो रहा है. बालू के अवैध कारोबार में लगे लोगों को विभाग व पुलिस-प्रशासन का तनिक भी भय नहीं है. ऐसा इसलिए कि बालू के उठाव में शुद्धता की गारंटी दी जा रही है. बालू का कण-कण एक औसत आकार का हो, इसलिए पहले बालू को चालने की भी व्यवस्था स्टॉक यार्ड में की गयी है. कई मजदूर इस काम का करने में लगे हुए हैं. पहले बालू को चाला जाता है. उसके बाद ट्रैक्टर पर लोडिंग की जा रही है.

काम पूरे दिन, लेकिन डिलीवरी अहले सुबह
जिला के अन्य क्षेत्र मसलन, सेक्टर क्षेत्र, चास, बालीडीह, फुसरो नगर क्षेत्र में बालू की आपूर्ति रात या अहले सुबह होती है. ग्राहकों तक बालू पहुंचाने का काम अहले सुबह होता है. ऐसा इसलिए ताकि लोगों को इसकी भनक नहीं लगे. जानकार बताते हैं कि सीधे तौर पर पुलिस की नजर में आने के बाद कार्रवाई का दबाव होता है. इस दबाव से बचने के लिए डिलीवरी अहले सुबह की जाती है.
इन घाटों से हो रहा अवैध उठाव
बोकारो जिले के पेटरवार प्रखंड के चलकरी, तेनुघाट व सुदूरवर्ती गागा ग्राम से सटे गोला प्रखंड के गंधनिया घाट, बेरमो में दामोदर नद के विभिन्न घाट के अलावा चंदनकियारी प्रखंड के अमलाबाद ओपी क्षेत्र में सीतानाला, दामोदर तट व गुडलीभिट्टा गांव के समीप व गवई नदी के विभिन्न घाट से बालू का उठाव हो रहा है. पिंड्राजोरा क्षेत्र में इजरी नदी के साथ बंगाल की कसाई नदी से भी बालू की आपूर्ति हो रही है.

प्रति ट्रैक्टर 1700 से 2000 रुपये की हो रही बचत
जानकारों की माने तो बालू का अवैध कारोबार जिला में पिछले कई साल से चल रहा है. वर्तमान में एनजीटी की रोक के कारण बालू की आवक कम हुई है. जबकि डिमांड पर कोई असर नहीं हुआ है. इस कारण अवैध कारोबार ज्यादा फल-फूल रहा है. जानकारों ने बताया कि नदी से बालू उठाव व स्टॉक में प्रति ट्रैक्टर 500 रुपये का अधिकतम खर्च आता है. जबकि डिलीवरी में खर्च 800-1000 रुपये का होता है. जबकि बाजार में बालू प्रति ट्रैक्टर 3200-3500 रुपये मिल रहा है. यानी प्रति ट्रैक्टर 1700 से 2000 रुपये का बचत कारोबारी को हो रहा है. एक दिन में ऐसे हजारों ट्रैक्टर से बालू की डिलीवरी हो रही है. इससे कारोबार का अंदाजा लगाया जा सकता है.
जिला के यह घाट हैं वैध
होसिर-10.86 हेक्टेयर, होसिर (डेंडे)-23.11 हेक्टेयर, चांपी (खेतको)-52.40 हेक्टेयर, पिछरी (02)-4.72 हेक्टेयर, चलकरी 8.22 हेक्टेयर व 14.67 हेक्टेयर और खेतको-चलकरी में 26.14 हेक्टेयर घाट की बंदोबस्ती हुई है. इसके अलावा 07 अन्य घाट को पंचायत स्तर पर संचालन करने की जिम्मेदारी मिली है.
