Hazaribagh:में लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल कीमतों और महंगे यातायात खर्च के बीच ई-रिक्शा अब आम लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. शहर से लेकर आसपास के कस्बों और बाजारों तक हजारों लोग रोजाना ई-रिक्शा से सफर कर रहे हैं. कम किराया और आसानी से उपलब्ध होने के कारण यह मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए सबसे सस्ता और सुविधाजनक साधन बनकर उभरा है.

शहर के झंडा चौक, बड़ा बाजार, कोर्रा, सिंदूर, मटवारी, कचहरी रोड, बड़कागांव रोड और बस स्टैंड जैसे इलाकों में सुबह से देर शाम तक ई-रिक्शा की आवाजाही लगातार बढ़ रही है. खासकर गर्मी और लगातार बढ़ते ईंधन खर्च के कारण लोग अब निजी वाहन की जगह ई-रिक्शा को प्राथमिकता दे रहे हैं. ई-रिक्शा चालकों का कहना है कि पहले जहां लोग छोटी दूरी के लिए बाइक या ऑटो का इस्तेमाल करते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग ई-रिक्शा का सहारा ले रहे हैं. कम किराया होने के कारण छात्र, महिलाएं, बुजुर्ग और मजदूर वर्ग सबसे ज्यादा इसका उपयोग कर रहे हैं.
ई -रिक्शा बेहतर विकल्प बना
पेट्रोल-डीजल के बढ़ते खर्च ने छोटे व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों की जेब पर भी असर डाला है. ऐसे में ई-रिक्शा कम खर्च में रोजमर्रा की यात्रा का बेहतर विकल्प बनकर सामने आया है. कई लोग अब बाजार आने-जाने, बच्चों को स्कूल पहुंचाने और अस्पताल जाने के लिए भी ई-रिक्शा का इस्तेमाल कर रहे हैं. हजारीबाग में ई-रिक्शा ने रोजगार के क्षेत्र में भी नई संभावनाएं पैदा की हैं. बेरोजगार युवा कम लागत में ई-रिक्शा खरीदकर रोजगार से जुड़ रहे हैं. शहर में हर दिन नए ई-रिक्शा सड़कों पर उतर रहे हैं, जिससे परिवहन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. स्थानीय लोगों का मानना है कि आने वाले समय में हजारीबाग में ई-रिक्शा की मांग और बढ़ेगी, क्योंकि यह आम लोगों के बजट के अनुकूल और आसान सफर का सबसे सुलभ साधन बन चुका है.
