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राज्य गठन के 26वें वर्ष में भी पुलिस चालकों के लिए नहीं बनी सेवा शर्त नियमावली, पदोन्नति ठप

– आरक्षी चालकों की सेवा नियमावली का प्रारूप फाइलों व पत्राचार में उलझा, कर्मियों के मनोबल पर पड़ रहा बुरा असर Ranchi:...

– आरक्षी चालकों की सेवा नियमावली का प्रारूप फाइलों व पत्राचार में उलझा, कर्मियों के मनोबल पर पड़ रहा बुरा असर

Ranchi: झारखंड राज्य गठन के 26 वर्ष बीत जाने के बाद भी झारखंड पुलिस के आरक्षी चालक संवर्ग के लिए अब तक सेवा शर्त (भर्ती, प्रोन्नति तथा अन्य सेवा शर्त) नियमावली का निर्माण नहीं हो सका है. नियमावली के अभाव में विभाग में कार्यरत आरक्षी चालकों को समय पर पदोन्नति और सेवा संबंधी अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, जिससे पुलिस बेड़े में तैनात चालकों के मनोबल पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार ने आधिकारिक तौर पर इस स्थिति को स्वीकार किया है. विधायक राजेश कच्छप द्वारा पूछे गए अल्पसूचित प्रश्न का उत्तर देते हुए गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने माना है कि राज्य में अब तक आरक्षी चालक संवर्ग के लिए पृथक नियमावली का गठन नहीं हो पाया है.

फाइलों और संशोधनों के जाल में उलझा प्रस्ताव:

– नियमावली बनाने की प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से विभागीय पत्राचार और संशोधनों के जाल में फंसी हुई है.

– विभागीय पत्र संख्या 2052 के माध्यम से नियमावली गठन संबंधी प्रस्ताव में संशोधन की आवश्यकता के तहत तालिकाबद्ध विवरण एवं विभिन्न बिंदुओं पर संशोधित नियमावली का प्रारूप तैयार कर गृह मंत्रालय से स्पष्ट मंतव्य मांगा गया था.

– 29 अक्टूबर 2021 को पुलिस मुख्यालय द्वारा पत्र संख्या 4140 के माध्यम से पुनः प्रस्ताव की मांग की गई, जो वर्तमान में भी प्रक्रियाधीन ही बताया जा रहा है.

पड़ोसी राज्य बिहार 2017 में ही बना चुका है नियमावली:

जहां एक ओर झारखंड में यह मामला प्रशासनिक सुस्ती का शिकार है, वहीं पड़ोसी राज्य बिहार ने इस दिशा में काफी पहले ही कदम उठा लिया था। बिहार सरकार ने वर्ष 2017 में ही (अधिसूचना संख्या 7855, दिनांक 20.09.2017) चालक संवर्ग के लिए सेवा नियमावली का गठन कर दिया था. इसके विपरीत, झारखंड में नियमावली न होने के कारण आरक्षी चालकों की समयबद्ध प्रोन्नति वर्षों से प्रभावित हो रही है.

10 वर्षों से ठप है पदोन्नति, 2016 में मिली थी अंतिम प्रोन्नति:

– सरकार द्वारा जारी आंकड़े दर्शाते हैं कि आरक्षी चालकों की पदोन्नति का मामला कितना गंभीर रूप ले चुका है.

– वर्ष 2011: पुलिस मुख्यालय द्वारा ‘चालक हवलदार’ से ‘परिवहन हवलदार’ की कोटि में पदोन्नति दी गई थी.

– वर्ष 2013: ‘चालक आरक्षी’ से ‘चालक हवलदार’ की कोटि में प्रोन्नति प्रदान की गई.

– वर्ष 2016: अंतिम बार ‘चालक आरक्षी’ से ‘चालक हवलदार’ तथा ‘चालक हवलदार’ से ‘परिवहन जमादार’ की कोटि में प्रोन्नति दी गई थी.

– वर्ष 2016 के बाद से यानी पिछले 10 वर्षों से चालकों की पदोन्नति का रास्ता पूरी तरह से बंद है. वर्तमान में विभाग ने यह तो स्वीकार किया है कि नई नियमावली के गठन की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है, लेकिन इसका गजट नोटिफिकेशन कब जारी होगा, इस पर कोई ठोस तिथि तय नहीं की गई है.

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