SAURAV SINGH

रांची: झारखंड में दशकों से जड़ें जमाए बैठे नक्सलवाद के खात्मे की घड़ी करीब आ गई है. केंद्र सरकार द्वारा देश से नक्सलवाद को पूरी तरह जड़ से मिटाने के लिए तय की गई 31 मार्च की समय-सीमा (डेडलाइन) में अब महज 38 दिन शेष रह गए हैं. सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव और सघन ऑपरेशनों के बीच राज्य में सक्रिय नक्सलियों की संख्या सिमटकर अब केवल 65 रह गई है.ताजा आंकड़ों के अनुसार, झारखंड के कुछ गिने-चुने इलाकों में ही नक्सलियों की मौजूदगी बची है. सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट बताती है कि, चाईबासा जिला अभी भी सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है, जहां सर्वाधिक 50 नक्सली कैंप किए हुए हैं. लातेहार और चतरा जिले में क्षेत्रों में क्रमश चार और चार नक्सली सक्रिय हैं, जबकि पलामू में केवल तीन नक्सलियों की मौजूदगी की सूचना है. हजारीबाग में यह संख्या घटकर महज दो रह गई है.
दो ही रास्ते: सरेंडर या एनकाउंटर:
सुरक्षाबलों की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति ने नक्सलियों को बैकफुट पर धकेल दिया है. 22 फरवरी से 31 मार्च के बीच का इन 38 बचे हुए दिन नक्सलियों के लिए निर्णायक साबित होने वाला है.अब उनके पास केवल दो ही विकल्प बचे हैं, पहला सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में शामिल होना और दूसरा सुरक्षाबलों की कार्रवाई में मारे जाना.
झारखंड में बचे 50 इनामी नक्सलियों की सूची:
एक करोड़ के दो इनामी नक्सली :
– मिसिर बेसरा
– असीम मंडल
25 लाख के दो इनामी नक्सली :
– ब्रजेश गंझु
– अजय महतो
15 लाख के आठ इनामी नक्सली :
– मोछू उर्फ मेहनत
– मदन महतो
– संजय महतो
– रामप्रसाद मारडी
– नितेश यादव
– रवीन्द्र गंझु
– बेला सरकार
– सहदेव महतो
10 लाख के नौ इनामी नक्सली :
– आरिफ जी
– मृत्युंजय जी
– मनोहर गंझु
– सलूका कायम
– पुष्पा महतो
– गोदराय यादव
– अमृत होरो
– चंदन लोहरा
– रंजीत गंझू
पांच लाख के 17 इनामी नक्सली :
– अनिल तुरी
– सुखलाल बिरजिया
– समीर सोरेन
– समीर महतो
– सुलेमान हांसदा
– सचिन बेंग
– गुलशन सिंह मुंडा
– जयंती
– प्रभात मुंडा
– पंकज कोरबा
– बिरेन सिंह
– सागेन अंगेरिया
– मिता
– मीणा
– राज भुइयां
– रामदेव लोहरा
– मीणा
दो लाख के चार इनामी नक्सली:
– करण
– मालती मुर्मू
– सोनाराम उर्फ सुदेश
– बलराम लोहरा
एक लाख के छह इनामी नक्सली :
– इसराइल
– बासु पूर्ति
– बासमती जेराई
– सामएल बुध
– फुलमनी कोड़ा
– चोगो पूर्ति
झारखंड गठन से अबतक नक्सली हमले में 556 जवान शहीद
– 2000: 03
– 2001: 44
– 2002: 77
– 2003: 19
– 2004: 36
– 2005: 28
– 2006: 48
– 2007: 08
– 2008: 38
– 2009: 71
– 2010: 25
– 2011: 29
– 2012: 25
– 2013: 26
– 2014: 14
– 2015: 05
– 2016: 08
– 2017: 04
– 2018: 10
– 2019: 13
– 2020: 02
– 2021: 06
– 2022: 02
– 2023: 05
– 2024: 03
– 2025: 07
– 2026: (अबतक) 00
– कुल: 556
सफलता के पीछे का ‘ट्रिपल एक्शन:
झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमाओं पर सुरक्षाबलों के बीच बेहतर समन्वय ने नक्सलियों के भागने के रास्ते बंद कर दिए हैं. हाल के समय में ‘बूढ़ा पहाड़’ जैसे अभेद्य किलों को नक्सलियों से मुक्त कराना एक बड़ी उपलब्धि रही है.इसके अलावा सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के कोर एरिया में अपने फॉरवर्ड बेस (कैंप) स्थापित कर दिए हैं, जिससे नक्सलियों की रसद और सूचना तंत्र ध्वस्त हो गया है. साथ ही राज्य सरकार की आकर्षक आत्मसमर्पण नीतियों के कारण बड़े कैडरों ने हथियार डाले हैं, जिससे निचले स्तर के लड़ाकों का मनोबल पूरी तरह टूट चुका है.
झारखंड गठन से अबतक सुरक्षाबलों ने 851 नक्सलियों को मार गिराया:
– 2000: 11
– 2001: 38
– 2002: 15
– 2003: 44
– 2004: 18
– 2005: 20
– 2006: 34
– 2007: 46
– 2008: 61
– 2009: 61
– 2010: 46
– 2011: 50
– 2012: 29
– 2013: 57
– 2014: 39
– 2015: 37
– 2016: 40
– 2017: 27
– 2018: 25
– 2019: 31
– 2020: 18
– 2021: 08
– 2022: 13
– 2023: 14
– 2024: 11
– 2025: 41
– 2026: (अबतक) 17
– कुल: 851

