Ranchi: झारखंड सरकार ने राज्य में मछली पालन के क्षेत्र को बढ़ावा देने की कवायद शुरू कर दी है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 37.50 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है. इस योजना के माध्यम से राज्य के मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने पर विशेष जोर दिया गया है. इसके अलावा, आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शुरू की गई ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत भी 6.92 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को क्रियान्वित करने की मंजूरी दी गई है.
केंद्र और राज्य का वित्तीय समन्वय
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केंद्र सरकार ने पूर्व में स्वीकृत परियोजनाओं के लिए 22.50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की है. इस राशि का उपयोग राज्य सरकार अपने समानुपातिक राज्यांश के साथ मिलकर करेगी. इस तरह कुल 37.50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों को आत्मनिर्भर बनाना है. जिला मत्स्य पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है कि लाभार्थी अपना 10% अंशदान समय पर जमा करें. साथ ही, इन परियोजनाओं को प्रशासनिक अनुमोदन मिलने की तिथि से 12 महीनों के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा.

योजना के कार्यान्वयन के लिए जारी किए गए दिशा निर्देश
- सरकार ने इस योजना के पारदर्शी कार्यान्वयन के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं:
- पूरी राशि का व्यय पब्लिक फाइनांशियल मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा.
- निदेशक, मत्स्य और सभी जिलों के जिला मत्स्य पदाधिकारी इसके निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी होंगे.
- जिला मत्स्य पदाधिकारियों को योजना की भौतिक प्रगति और स्थल सत्यापन की रिपोर्ट नियमित रूप से निदेशालय को भेजनी होगी.
- अनुदान की राशि कार्य की प्रगति के अनुसार तीन किस्तों में दी जाएगी. अंतिम किस्त कार्य पूर्ण होने के पश्चात ही जारी की जाएगी.
- सभी प्रकार की खरीद में ‘झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज मैनुअल’ के प्रावधानों का अक्षरशः पालन अनिवा
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