Hazaribagh : कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और झारखंड बालिका आवासीय विद्यालयों में खाद्यान्न, सब्जी और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना, हजारीबाग द्वारा कराई गई टेंडर प्रक्रिया विवादों में घिर गई है. आरोप है कि पूरी निविदा प्रक्रिया में सरकारी नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा एजेंसियों को लाभ पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से कार्य किया गया. साथ ही स्थानीय फर्मों को प्राथमिकता देने के प्रावधान का भी पालन नहीं किए जाने की बात सामने आ रही है.

री-टेंडर नहीं होने पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार, राज्य परियोजना पदाधिकारी के निर्देशों के बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में री-टेंडर की प्रक्रिया नहीं अपनाई गई. इस संबंध में पूछे जाने पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. कुमुदी नीलम ने कहा कि कार्यादेश एक वर्ष की अवधि के लिए जारी किया गया है. इसलिए कार्यकाल पूरा होने के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी. उन्होंने कहा कि यदि किसी एजेंसी को दोबारा कार्य मिलने की बात कही जा रही है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि किस आधार पर कार्य आवंटित हुआ.
भौतिक सत्यापन पर भी सवाल
आरोप है कि पिछली टेंडर प्रक्रिया के दौरान मेसर्स कामाख्या इंटरप्राइजेज के भौतिक सत्यापन में भी नियमों का पालन नहीं किया गया. बताया जाता है कि सत्यापन के दौरान एजेंसी की प्रत्येक प्रखंड में दुकानें दर्शाई गईं, जबकि इसकी पात्रता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, बरकट्ठा, कटकमदाग और सदर स्थित बालिका आवासीय विद्यालयों में राशन और सब्जी आपूर्ति का कार्य इस एजेंसी को एल-1 श्रेणी में दिया गया था. हालांकि कई मामलों में बाद में कार्य आवंटन में बदलाव किए जाने की भी चर्चा है.
एल-2 एजेंसियों को भी मिला कार्य
टेंडर प्रक्रिया में यह भी आरोप है कि कुछ स्थानों पर एल-1 एजेंसी को मिला कार्य बाद में एल-2 श्रेणी की एजेंसियों को दे दिया गया. पदमा कस्तूरबा विद्यालय में राशन आपूर्ति का ठेका कामाख्या इंटरप्राइजेज को मिला, लेकिन सब्जी आपूर्ति का कार्य एल-2 श्रेणी की बाबा शिवम इंटरप्राइजेज को दिए जाने का आरोप है. चुरचू कस्तूरबा विद्यालय में एजेंसी को केवल सब्जी आपूर्ति का कार्य मिला, जबकि राशन आपूर्ति दूसरी एल-2 एजेंसी को सौंपे जाने की बात कही जा रही है. कटकमदाग कस्तूरबा विद्यालय में भी पहले आवंटित सब्जी आपूर्ति का कार्य वापस लेकर एल-2 श्रेणी की एसके इंटरप्राइजेज को दिए जाने की चर्चा है. जानकारों का कहना है कि सामान्य नियमों के अनुसार यदि एल-1 एजेंसी कार्य करने से इंकार करे और एल-2 एजेंसी एल-1 की दर पर कार्य करने के लिए सहमत हो, तभी उसे कार्य दिया जा सकता है. ऐसे में कार्य आवंटन की पूरी प्रक्रिया की जांच की मांग उठ रही है.
वास्तविक आपूर्ति को लेकर भी सवाल
सूत्रों का दावा है कि कुछ विद्यालयों में जिन एजेंसियों के नाम पर आपूर्ति दिखाई जा रही है, वहां वास्तविक आपूर्ति किसी शिक्षक अथवा अन्य माध्यम से कराई जाती है. पदमा, कटकमसांडी और कटकमदाग के कस्तूरबा विद्यालयों का नाम इस संदर्भ में सामने आ रहा है.
निष्पक्ष जांच की मांग
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो टेंडर प्रक्रिया, पात्रता सत्यापन और कार्य आवंटन से जुड़े कई तथ्य सामने आ सकते हैं. उनका मानना है कि यदि कहीं नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. फिलहाल जिला कार्यक्रम पदाधिकारी का कहना है कि कार्यादेश निर्धारित अवधि के लिए वैध है और नियमानुसार अवधि समाप्त होने के बाद ही आगे की टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी. वहीं दूसरी ओर टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विभिन्न स्तरों पर सवाल लगातार उठ रहे हैं.

