Hazaribagh: कटकमसांडी अंचल कार्यालय एक बार फिर भूमि प्रतिवेदन को लेकर विवादों में है. आरोप है कि महज 25 डिसमिल (लगभग 0.26 एकड़) हिस्सेदारी वाली जमीन के बदले 1.50 एकड़ निजी भूमि का प्रतिवेदन जारी कर दिया गया. इसी प्रतिवेदन के आधार पर भूमि संरक्षण विभाग की निजी तालाब गहरीकरण योजना के तहत करीब 16 लाख रुपये की लागत से तालाब का निर्माण भी हो गया और राशि का भुगतान भी कर दिया गया.मामला सामने आने के बाद अंचल कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल और नियमों का पालन किए प्रतिवेदन जारी किया गया, जिससे सरकारी राशि के दुरुपयोग की आशंका पैदा हो गई है.

भूमि प्रतिवेदन पर उठे सवाल
जानकारी के अनुसार भूमि संरक्षण विभाग की निजी तालाब योजना के लिए बालकृष्ण राय के नाम से 1.50 एकड़ निजी भूमि का प्रतिवेदन जारी किया गया. बताया गया कि संबंधित भूमि की जमाबंदी सुभाष राय के नाम दर्ज है. राजस्व अभिलेखों के अनुसार कुल 6.38 एकड़ भूमि दर्ज है, जिसका स्वरूप गैर मजरूआ खास बताया गया है. सुभाष राय के छह पुत्र हैं और बंटवारे के अनुसार प्रत्येक के हिस्से में लगभग 1.06 एकड़ भूमि आती है. आगे की पारिवारिक हिस्सेदारी के अनुसार संबंधित लाभुक बालकृष्ण राय के हिस्से में केवल 0.26 एकड़ (25 डिसमिल) जमीन आती है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब हिस्सेदारी मात्र 25 डिसमिल की थी, तब 1.50 एकड़ भूमि का प्रतिवेदन किस आधार पर जारी किया गया?
इसी प्रतिवेदन के आधार पर बना तालाब
ग्रामीणों का आरोप है कि इसी भूमि प्रतिवेदन को आधार बनाकर निजी तालाब निर्माण योजना स्वीकृत हुई. लगभग 16 लाख रुपये की लागत से तालाब का निर्माण कराया गया और योजना की राशि का भुगतान भी कर दिया गया. अब पूरे मामले में यह सवाल उठ रहा है कि यदि भूमि प्रतिवेदन ही तथ्यों के विपरीत जारी हुआ, तो योजना की स्वीकृति और भुगतान की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया.
ग्रामीणों ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले में बड़े स्तर पर अनियमितता हुई है. उनका आरोप है कि गांव के जनप्रतिनिधियों और स्थानीय स्तर पर वास्तविक स्थिति की पुष्टि किए बिना प्रतिवेदन तैयार किया गया. ग्रामीणों का कहना है कि यदि लाभुक के हिस्से में केवल 25 डिसमिल भूमि है, तो डेढ़ एकड़ का प्रतिवेदन जारी करना नियमों के विरुद्ध है. उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
कटकमसांडी अंचल कार्यालय को लेकर लोगों की शिकायत नई नहीं है. आम लोगों का आरोप है कि म्यूटेशन, भूमि प्रतिवेदन और राजस्व संबंधी कार्यों में अनावश्यक विलंब किया जाता है. कई लोगों का कहना है कि महीनों तक फाइलें लंबित रहती हैं, जबकि प्रभावशाली लोगों के मामलों का त्वरित निष्पादन हो जाता है. इस कारण अंचल कार्यालय की कार्यशैली लगातार सवालों के घेरे में रही है.
क्या कहते हैं अंचल अधिकारी
कटकमसांडी के अंचल अधिकारी अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है. उन्होंने बताया कि मंगलवार को संबंधित अभिलेखों की जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि प्रतिवेदन किस आधार पर जारी किया गया. उन्होंने कहा कि जिस कर्मचारी ने प्रतिवेदन तैयार किया है, उससे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. यदि जांच में किसी प्रकार की त्रुटि या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
अब जांच पर टिकी निगाहें
पूरे प्रकरण ने एक बार फिर राजस्व विभाग में भूमि प्रतिवेदन जारी करने की प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि वास्तविक हिस्सेदारी से अधिक भूमि का प्रतिवेदन जारी किया गया, तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि सरकारी योजना के क्रियान्वयन पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न होगा. अब लोगों की निगाहें प्रशासन की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं.

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