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हजारीबाग: आदिम जनजातीय संस्कृति से रूबरू हुए डीवीसी कोनार परियोजना के प्रमुख राणा रंजीत सिंह, तीरंदाजी में भी आजमाए हाथ

Hazaribagh: डीवीसी कोनार परियोजना के प्रमुख राणा रंजीत सिंह ने शुक्रवार को क्षेत्र के आदिम जनजातीय परिवारों से मुलाकात कर उनकी पारंपरिक...

Hazaribagh: डीवीसी कोनार परियोजना के प्रमुख राणा रंजीत सिंह ने शुक्रवार को क्षेत्र के आदिम जनजातीय परिवारों से मुलाकात कर उनकी पारंपरिक जीवन शैली, संस्कृति, और उनके शिकार कला के बारे में जाना. इस दौरान उन्होंने जनजातीय समाज द्वारा शिकार में उपयोग किए जाने वाले पारंपरिक औजारों और तीरंदाजी की तकनीकों को भी करीब से देखा और समझा. जनजातीय परिवारों ने पारंपरिक हथियारों तीर कमान और शिकार से जुड़े विभिन्न उपकरणों के उपयोग की जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि पूर्वजों के समय से हीं जंगलों में जीवन यापन और आत्मरक्षा के लिए इन पारंपरिक विधियों का उपयोग किया जाता रहा है. इस मौके पर राणा रंजीत सिंह ने भी तीर चला कर निशाना साधने का प्रयास किया. जनजातीय युवाओं ने उन्हें तीरंदाजी की पारंपरिक शैली और तकनीक के बारे में जानकारी दी. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया.

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आदिम जनजातीय समाज की संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर

कोनार परियोजना के प्रधान राणा रंजीत सिंह ने कहा कि आदिम जनजातीय समाज की संस्कृति, परंपराएं और पारंपरिक ज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर है. इन्हें संरक्षित और सम्मानित करना हम सभी की जिम्मेदारी है. जनजातीय समाज प्रकृति के बेहद करीब रहकर जीवन जीता है और उनकी परंपराओं में प्रकृति संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश छिपा हुआ है. वहीं स्थानीय लोगों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्रशासनिक और परियोजना स्तर के अधिकारियों का जनजातीय समाज के बीच पहुंचना और उनकी संस्कृति को समझने का प्रयास करना एक सकारात्मक पहल है. इससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी जुड़ाव और सम्मान की भावना मजबूत होती है.

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